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CWG 2026: देश के लिए कुर्बान किया था पैर, उसी फौजी ने जीता ऐतिहासिक गोल्ड, रोंगटे खड़े कर देगी सोमन राणा की कहानी

Soman Rana Inspirational Story: 2006 में देश की सेवा करते हुए अपना पैर गंवाने वाले पूर्व गोरखा राइफल्स के जवान सोमन राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शॉट पुट F57 में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। जानिए सेना के इस जांबाज की हिम्मत और गोल्ड तक के सफर की प्रेरक कहानी।
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Aug 02, 2026
Soman Rana Gold Medal CWG 2026
सोमन राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जीता गोल्ड मेडल (फोटो- IANS)

Soman Rana Wins Gold Medal at CWG 2026: सोमन राणा को आज भारत के गोल्ड मेडलिस्ट के रूप में जाना जा रहा है। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शनिवार को शॉट पुट F57 स्पर्धा में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। पूर्व गोरखा राइफल्स के इस जवान ने देश के लिए 2006 में अपना पैर गंवा दिया था। इसके बावजूद देश के लिए कुछ कर गुजर जाने की उनकी चाह कम नहीं हुई और पैरा एथलेटिक्स के लिए ग्लासगो में तिरंगा लहरा दिया।

इससे पहले सोमन ने 2022 (2023) में हुए एशियन पैरा गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था। वहां उन्होंने अपना बेस्ट प्रदर्शन करते हुए 13.40 मीटर दूर गोला फेंककर ऐतिहासिक मेडल हासिल किया था। उन्होंने कहा, "मैं भारतीय सेना से हूं। साल 2006 में ड्यूटी के दौरान मैंने अपना दाहिना पैर गंवा दिया था। इसके बाद मैं ड्यूटी करता रहा, लेकिन फिर मुझे पैरालंपिक खेलों के बारे में पता चला और मैंने साल 2017 से इसके लिए तैयारी शुरू की।"

कब और कैसे हुआ था हादसा

भारतीय सेना में गोरखा राइफल्स के पूर्व जवान सोमन राणा की 2006 में जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास पोस्टिंग थी। 1 दिसंबर 2006 को एक सर्च ऑपरेशन के दौरान उनका पैर गलती से एक लैंडमाइन पर पड़ गया। विस्फोट में उनका दायां पैर बुरी तरह घायल हो गया, जिससे उनका वह पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा। हादसा होने से पहले सोमन राणा नेशनल लेवल के बॉक्सर थे। पैर गंवाने के बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लगभग 10 साल बाद 2016-17 में पुणे के 'आर्टिफिशियल लिंब सेंटर' और 'आर्मी पैरालंपिक नोड' से जुड़कर पैरा शॉट पुट में अपनी दूसरी पारी शुरू की।

सोमन ने आगे बताया, "एक पैर गंवाने के बाद पहले बहुत सोचता था, क्योंकि आदमी आम चोट लगने के बाद तो ठीक से चल नहीं पाता है और मेरा तो एक पैर चला गया था। इसके बाद नकली पैर को लगाकर, उसकी आदत बनाकर खेलों में उतरना बहुत मुश्किल था। मुश्किलों को आसान करते-करते मैं यहां तक पहुंचा।" भारतीय पैरा एथलीट ने बताया कि उन्हें परिवार, पीसीआई (PCI), भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और सेना की तरफ से पूरा सपोर्ट मिला। उन्होंने कहा कि सबका सपोर्ट होने की वजह से ही मैं यहां पर पहुंचकर देश के लिए मेडल जीत सका हूं।

सोमन ने बताया कि बाकी पैरा एथलीटों को देखकर उनके अंदर कुछ करने का हौसला जागा। उन्होंने बताया, "शुरुआत में समझ नहीं आ रहा था कि नकली पैर लगाकर कैसे चल पाऊंगा और कैसे खेलों में हिस्सा ले पाऊंगा। हालांकि, बाकी पैरा एथलीटों को मैंने देखा, जिनका पूरा पैर ही नहीं था। फिर मुझे लगा कि उनके मुकाबले कम से कम मेरा पैर कुछ तो चलने लायक है। इस तरह से मुझे प्रेरणा मिली।" उन्होंने कहा कि वह अपना यह मेडल उनका समर्थन करने वाले पीसीआई, भारतीय खेल प्राधिकरण, सेना और अपने परिवार को समर्पित करना चाहते हैं।

Updated on:
02 Aug 2026 10:51 am
Published on:
02 Aug 2026 10:51 am