
अनूपगढ़। सिंचाई पानी के संकट को लेकर अनूपगढ़-घड़साना क्षेत्र में चल रहा किसान आंदोलन गुरुवार को और तेज हो गया। घड़साना में खेत बचाओ किसान बचाओ समिति की ओर से आंदोलन जारी रहने के बीच किसानों ने अपनी घोषणा के अनुसार नेशनल हाईवे संख्या 911 पर गांव पतरोड़ा में चक्का जाम कर दिया। गांव के बस स्टैंड के पास बड़ी संख्या में किसान एकत्र हुए और सड़क पर बैठकर सिंचाई पानी सहित विभिन्न मांगों को लेकर विरोध जताया। किसानों के चक्का जाम के कारण हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ। किसानों ने आंदोलन को व्यापक रूप देने की घोषणा पहले ही कर दी थी।
अनूपगढ़ के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी गुरुवार को चक्का जाम किया जा रहा है। लूणियां में सुबह किसानों ने बस स्टैंड के पास चक्का जाम किया। किसानों का कहना है कि सिंचाई पानी का संकट केवल एक क्षेत्र का मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे पूरे इलाके की कृषि व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसके अलावा एक अन्य संगठन किसान मजदूर व्यापारी संघर्ष समिति की ओर से अनूपगढ़ एडीएम कार्यालय के समक्ष भी चौथे दिन धरना जारी रहा। किसानों का कहना है कि सिंचाई पानी के रेगुलेशन को लेकर जब तक उनकी मांग के अनुरूप स्पष्ट और लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
किसानों ने क्षेत्र के अधिक से अधिक लोगों से आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है। आंदोलन के बीच बुधवार को सरकार की ओर से भेजे गए प्रतिनिधिमंडल और किसानों के बीच हुई वार्ता में पांच बारी सिंचाई पानी देने का आश्वासन दिया गया था। साथ ही बांधों में पानी की आवक की स्थिति की समीक्षा के बाद छठी बारी पर विचार करने की बात कही गई थी। इसके बावजूद किसान 8 बारी पानी की मांग पर कायम हैं। किसान नेताओं का कहना है कि बांध में उपलब्ध पानी और पूर्व में दिए गए रेगुलेशन को देखते हुए किसानों को आठ बारी पानी मिलना चाहिए।
किसानों के आंदोलन को देखते हुए जयपुर से सिंचाई विभाग के जनरल चीफ को अनूपगढ़ भेजा जा रहा है। किसानों के अनुसार गुरुवार शाम करीब 5 बजे अनूपगढ़ के एडीएम कार्यालय में जनरल चीफ के साथ वार्ता प्रस्तावित है। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वार्ता में आठ बारी पानी के रेगुलेशन को लेकर लिखित आदेश की मांग रखी जाएगी। उनका कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर धरना और महापड़ाव समाप्त नहीं किया जाएगा।
किसानों की मांग पर देर रात सिंचाई विभाग के अधिकारी प्रदीप रस्तोगी का हनुमानगढ़ स्थानांतरण किए जाने की जानकारी सामने आई। किसानों की ओर से अधिकारियों के रवैये को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। आंदोलनकारी किसान सिंचाई पानी के रेगुलेशन के साथ अधिकारियों की जवाबदेही, नहरों के जीर्णोद्धार और अन्य मांगों को लेकर भी सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।