श्री गंगानगर

Rajasthan Nikay Chunav : जेठानी-देवरानी की ‘सुपरहिट’ जोड़ी, एक कांग्रेस से तो एक निर्दलीय जीती, हर तरफ हो रही चर्चा

अनूपगढ़ नगरपालिका चुनाव के परिणामों में राजनीतिक दलों के मुकाबले और जीत-हार के आंकड़ों के बीच एक पारिवारिक परिणाम भी खास चर्चा में रहा। देवरानी और जेठानी ने अलग-अलग राजनीतिक पहचान के साथ चुनाव मैदान में उतरकर जीत दर्ज की।
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Ritika Midha Kamra and Shalini
देवरानी और जेठानी। फोटो: पत्रिका

अनूपगढ़। नगरपालिका चुनाव के परिणामों में राजनीतिक दलों के मुकाबले और जीत-हार के आंकड़ों के बीच एक पारिवारिक परिणाम भी खास चर्चा में रहा। देवरानी और जेठानी ने अलग-अलग राजनीतिक पहचान के साथ चुनाव मैदान में उतरकर जीत दर्ज की। जेठानी रितिका मिढा कामरा कांग्रेस से चुनाव लड़ीं और जीत हासिल की, जबकि उनकी देवरानी शालिनी ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ते हुए जीत दर्ज की। अब दोनों एक ही नगरपालिका बोर्ड का हिस्सा होंगी। रितिका ने कांग्रेस के टिकट पर वार्ड 25 से चुनाव लड़ा। उनके सामने भाजपा के हुकम सिंह थे। मुकाबला बेहद करीबी रहा। रितिका को 250 वोट मिले, जबकि हुकम सिंह को 243 वोट मिले।

इस तरह रितिका ने महज सात वोट के अंतर से जीत दर्ज की। वार्ड 25 का परिणाम उन मुकाबलों में शामिल रहा, जहां कुछ ही वोटों ने चुनाव का फैसला बदल दिया। दूसरी ओर रितिका की देवरानी शालिनी ने पार्टी के टिकट के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में वार्ड 26 से चुनाव लड़ा। यहां भी मुकाबला दो निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच रहा। शालिनी को 291 वोट मिले, जबकि राजगिर को 254 वोट मिले। शालिनी ने 37 वोट के अंतर से जीत दर्ज की। इस जीत के साथ वह भी नगरपालिका में पार्षद के रूप में पहुंचने में सफल रहीं।

दोनों के चुनावी रास्ते अलग, लेकिन मंजिल एक रही

इस चुनाव की खास बात यह रही कि दोनों के चुनावी रास्ते अलग थे, लेकिन मंजिल एक रही। रितिका के पति साहिल कामरा और सास उषा कामरा पूर्व में नगरपालिका की पूर्व उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। वहीं, ससुर भजन लाल कामरा लंबे समय तक कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष रहे हैं। हालांकि रितिका और शालिनी ने पहली बार राजनीति में कदम रखा और विजय हासिल की।

अनूपगढ़ में बदली सियासत की तस्वीर, कांग्रेस सबसे बड़ा दल

अनूपगढ़ नगरपालिका चुनाव के नतीजों ने शहर की राजनीति की तस्वीर बदल दी। सोमवार को स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल में हुई मतगणना में 35 वार्डों के परिणाम सामने आए। कांग्रेस 16 वार्डों में जीत के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी, जबकि भाजपा को 7 वार्ड मिले। निर्दलीयों ने 12 वार्डों में जीत दर्ज कर दोनों प्रमुख दलों के चुनावी गणित को चुनौती दी। वार्ड 28 में कांग्रेस की सुमन चुघ पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुकी थीं। ऐसे में 35 सदस्यीय बोर्ड में 12 निर्दलीयों की मौजूदगी चुनाव परिणाम का अहम राजनीतिक संकेत मानी जा रही है।