Bathinda-Lalgarh Railway Line: बठिण्डा-लालगढ़ रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है और गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ है। 320 किमी लंबी इस परियोजना को ‘स्पेशल रेल प्रोजेक्ट’ घोषित किया गया है।
Bathinda-Lalgarh Railway Line: सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर): बीकानेर रेल मंडल की सबसे महत्वपूर्ण और प्रतीक्षित परियोजनाओं में से एक, बठिंडा-लालगढ़ रेलवे लाइन दोहरीकरण को केंद्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजीव श्रीवास्तव द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, 320 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन को अब 'स्पेशल रेल प्रोजेक्ट' घोषित किया गया है। इस घोषणा के बाद अब इस रूट पर रेल यातायात की क्षमता दोगुनी करने का काम फास्ट ट्रैक मोड पर होगा।
गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने इस परियोजना में हो रही देरी और तकनीकी स्वीकृतियों के इंतजार के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। पत्रिका ने 13 मार्च के अंक में ‘बठिंडा-लालगढ़ रेल दोहरीकरण: डीपीआर को मिली तकनीकी स्वीकृति, अब नीति आयोग की मंजूरी का इंतजार’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर प्रशासन का ध्यान खींचा था। पत्रिका की इस मुहिम के बाद केंद्र सरकार ने त्वरित निर्णय लेते हुए इसे विशेष दर्जा प्रदान किया है।
परियोजना मूल्यांकन समिति ने इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए 3455 करोड़ रुपए के प्राक्कलन को मंजूरी दी है। 'स्पेशल रेल प्रोजेक्ट' का दर्जा मिलने से इस परियोजना को कई प्रशासनिक और कानूनी लाभ मिलेंगे।
फास्ट ट्रैक भूमि अधिग्रहण: विशेष दर्जा मिलने से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में आने वाली बाधाएं न्यूनतम होंगी और काम तेजी से शुरू हो सकेगा।
प्रशासनिक सुगमता: इस प्रोजेक्ट से जुड़ी फाइलें अब लालफीताशाही का शिकार नहीं होंगी और सीधे उच्च स्तर पर मॉनिटर की जाएंगी।
समय सीमा में पूर्णता: कानूनी पेचदगियां कम होने से प्रोजेक्ट को निर्धारित डेडलाइन के भीतर पूरा करना आसान होगा।
तीन राज्यों को मिलेगा सीधा फायदा
यह 320 किमी लंबी रेल लाइन पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के व्यापारिक और सामरिक हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दोहरीकरण होने से इस मार्ग पर मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों की संख्या बढ़ सकेगी, जिससे उत्तर भारत का रेल नेटवर्क और अधिक सुदृढ़ होगा।
रेलवे बोर्ड की परियोजना मूल्यांकन समिति ने 20 फरवरी को इसकी डीपीआर (DPR) को तकनीकी स्वीकृति दी थी, जिसके बाद अब गजट नोटिफिकेशन जारी होने से निर्माण कार्यों का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।