
श्रीगंगानगर.खेतों में उगने वाली फसलें केवल उपज नहीं होतीं,बल्कि किसी क्षेत्र की पहचान और उसकी सांस्कृतिक विरासत भी होती हैं। इन्हीं उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में राजस्थान ने अहम कदम बढ़ाया है। पत्रिका के जीआई टैग अभियान के बीच श्रीगंगानगर के किन्नू, गाजर और माल्टा, बीकानेर के सांगरी, मोठ और इसबगोल तथा उदयपुर के सीताफल को भौगोलिक संकेतक (जीआइ) टैग दिलाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार तकनीकी और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है तथा अब आवेदन परीक्षण के चरण में हैं। राजस्थान स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं जीआइ टैग सलाहकार डॉ.सुजीत यादव ने बताया कि उनकी देखरेख में सात कृषि उत्पादों के आवेदन तैयार किए गए हैं। गाजर और माल्टा के आवेदन जीआई पोर्टल पर अपलोड हो चुके हैं,जबकि किन्नू के आवेदन के लिए उद्योग विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिलना शेष है। एनओसी मिलने के बाद बेबसाइट पर रिपोर्ट अपलोड की जाएगी। इसके बाद जीआई रजिस्ट्री में परीक्षण,आपत्तियों और सत्यापन सहित पूरी प्रक्रिया में करीब दो वर्ष का समय लग सकता है।