श्री गंगानगर

Rajasthan: मां का साया छिना, ब्लड कैंसर ने घेरा, पाठशाला जाना छूटा मगर पढ़ने का ख्वाब नहीं टूटा

Inspirational Student Story: जिंदगी जब इम्तिहान लेती है तो तैयारी का बिलकुल भी मौका नहीं देती। श्रीगंगानगर जिले के गांव मिर्जावाला निवासी 15 वर्षीय साजिद के साथ भी ऐसा ही हुआ है। पहले मां का साया छिन गया और अब ब्लड कैंसर ने घेर लिया है। इसके बावजूद हालात और बीमारी से बालक पूरे हौसले से लड़ रहा है। बीमारी से पाठशाला जाना छूट गया। मगर पढ़ने का ख्वाब नहीं टूटा है। उसकी आंखों में पढ़कर शिक्षक बनने का सपना पल रहा है।
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School Student Cancer Battle
ब्लड कैंसर पीड़ित छात्र साजिद, छोटी बहन जानवी, पत्रिका फोटो

Inspirational Student Story: जिंदगी जब इम्तिहान लेती है तो तैयारी का बिलकुल भी मौका नहीं देती। श्रीगंगानगर जिले के गांव मिर्जावाला निवासी 15 वर्षीय साजिद के साथ भी ऐसा ही हुआ है। पहले मां का साया छिन गया और अब ब्लड कैंसर ने घेर लिया है। इसके बावजूद हालात और बीमारी से बालक पूरे हौसले से लड़ रहा है। बीमारी से पाठशाला जाना छूट गया। मगर पढ़ने का ख्वाब नहीं टूटा है। उसकी आंखों में पढ़कर शिक्षक बनने का सपना पल रहा है। लेकिन बीमारी और उस पर बढ़ते खर्च ने साजिद के दिहाड़ी मजदूर परिवार के हालात बिगाड़ दिए हैं।

हाथों में किताबों की जगह दवाइयों की फाइलें हैं और पाठशाला की राह की जगह बीकानेर के पीबीएम अस्पताल का रास्ता बालक की दिनचर्या बन गया है जो बहुत पीड़ादायक और महंगा भी है। श्रीगंगानगर जिले के गांव मिर्जावाला का रहने वाला साजिद 9वीं कक्षा का छात्र है। होनहार विद्यार्थी साजिद को इस साल जनवरी में लगातार बुखार आने पर जांच कराई गई तो परिवार पर मानो पहाड़ टूट पड़ा। डॉक्टरों ने ब्लड कैंसर होने की पुष्टि की। इसके बाद साजिद का बचपन अचानक बदल गया।

बिगड़ रहे हालात

पिछले पांच माह से साजिद का इलाज बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में चल रहा है। हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित सुरेशिया के वार्ड 60 निवासी उसके फूफा राजकुमार और बुआ किरण उसे अपने पास रखकर इलाज करवा रहे हैं। आयुष्मान कार्ड बना हुआ है जिसके चलते अस्पताल में दवाएं और सुविधाएं नि:शुल्क मिल जाती हैं। लेकिन कई बाहर की दवाएं, जांच, यात्रा और अन्य खर्च भी हैं जो परिवार की क्षमता से बाहर होते जा रहे हैं।

परिजन बताते हैं कि हर महीने 40 हजार रुपए से अधिक खर्च हो रहे हैं। अब तक दो से ढाई लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। आगे का इलाज भी लंबा है और खर्च लगातार जारी रहेगा। परिवार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं आर्थिक तंगी के कारण इलाज बीच में न रुक जाए।

संकट में जिंदगी

साजिद की मां बंसी की कोरोना काल में मृत्यु हो चुकी है। पिता जाकिर हुसैन दिहाड़ी मजदूर हैं और स्वयं गुर्दे की बीमारी से पीड़ित हैं। परिवार बीपीएल श्रेणी में आता है। उनके पास न जमीन है और न आय का कोई स्थाई साधन है। साजिद की छोटी बहन जानवी अभी पढ़ाई कर रही है।

फिर जाना चाहता हूं स्कूल

साजिद से जब उसके सपनों के बारे में पूछा जाता है तो थकी सी आवाज में सिर्फ इतना कहता है कि ठीक होकर फिर से स्कूल जाना चाहता हूं। उसके इस छोटे से सपने में ही उसकी पूरी दुनिया बसती है। दूसरी ओर परिवार की पीड़ा यह है कि अब अकेले संघर्ष करना मुश्किल हो रहा है। समाज और भामाशाहों का सहयोग मिले तो इलाज भी जारी रह सकेगा और बालक के पढऩे व शिक्षक बनने का सपना भी पूरा होने की उम्मीद बंधी रहेगी।

Published on:
24 Jun 2026 12:36 pm