
श्रीगंगानगर। केंद्रीय कारागृह श्रीगंगानगर में निषिद्ध सामग्री की बरामदगी के दो मामले सामने आए है। एक मामले में बैरक में तलाशी के दौरान बंदी के पास से 180 मेडिकल गोलियां मिलीं, जबकि दूसरे मामले में बंदी से मुलाकात करने पहुंचे उसके पिता के जूतों के तलवों के नीचे छिपाकर रखे गए तीन पाउच बरामद हुए। इनमें 189 सफेद गोलियां और सफेद रंग का पाउडर मिला। दोनों घटनाओं ने जेल के भीतर निषिद्ध सामग्री पहुंचने के प्रयासों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए है। पुलिस ने दोनों मामलों में कारागार (राजस्थान संशोधन) अधिनियम, 2015 की धारा 42 के तहत कार्रवाई की है।
पहले मामले में बुधवार को दोपहर करीब 12.05 से 1 बजे तक वार्ड संख्या पांच में तलाशी अभियान चलाया गया। उप कारापाल चरण सिंह, सहायक कारापाल सतवीर, मुख्य प्रहरी और अन्य ड्यूटीकर्मियों की मौजूदगी में हुई तलाशी के दौरान बैरक नंबर 17 में निरुद्ध बंदी जगजीत उर्फ जग्गी पुत्र दारा सिंह के पास एक थैली में रखी 180 मेडिकल गोलियां बरामद हुई। गोलियां मिलने के बाद जेल प्रशासन ने उन्हें जब्त कर फर्द तैयार की और सामग्री को सीलबंद पैकेट में पुलिस के सुपुर्द किया। केंद्रीय कारागृह श्रीगंगानगर के प्रहरी विनोद कुमार ने पुलिस थाना कोतवाली में रिपोर्ट पेश की। इसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच सहायक उपनिरीक्षक विजय कुमार को सौंपी गई है।
दूसरे मामले में बंदी विनय कुमार से मुलाकात करने पहुंचे उसके पिता गुलाबाराम के पास से संदिग्ध सामग्री बरामद हुई। पुलिस को दी गई रिपोर्ट के अनुसार, 21 अक्टूबर को मुलाकात के बाद गुलाबाराम ने बंदी को देने के लिए काले जूतों की एक जोड़ी क्वार्टर गार्ड पर तैनात तलाशी संतरी दीपचंद को सौंपी थी। जूतों की जांच के दौरान तलवों के नीचे छिपाए गए तीन पारदर्शी पाउच मिले। इनमें दो पाउच में कुल 189 सफेद गोलियां और एक पाउच में सफेद रंग का पाउडर था। इसकी सूचना संबंधित प्रभारी को दी। इसके बाद जेल अधीक्षक को अवगत करवाया गया और उनके निर्देश पर पुलिस कार्रवाई की गई।
दूसरे मामले में गुलाबाराम पर अपने जेल में बंद बेटे तक निषिद्ध सामग्री पहुंचाने का प्रयास करने का आरोप है। बरामद सामग्री को जब्त कर संबंधित दस्तावेजों के साथ पुलिस को सौंपा गया। इस मामले में भी जांच शुरू की गई है। दोनों मामलों में बरामद गोलियों की प्रकृति और
सफेद पाउडर की पहचान स्पष्ट होना बाकी है। जांच के बाद ही यह पता चल सकेगा कि सामग्री किस प्रकार की थी और वह कहां से लाई गई थी। लगातार सामने आए इन मामलों के बीच जेल में तलाशी और सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता भी चर्चा का विषय बन गई है।
केंद्रीय कारागृह के अधीक्षक महावीर मीणा ने कहा कि जेल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बरती जा रही है और निषिद्ध सामग्री पहुंचाने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि एक बंदी का पिता जूतों के तलवों में छिपाकर नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाला पाउडर लाने का प्रयास कर रहा था, लेकिन तलाशी के दौरान उसे पकड़ लिया गया। वहीं, जेल के भीतर बैरक में तलाशी के दौरान एक अन्य बंदी से ऐसी दवाइयां बरामद हुई हैं. जिनका इस्तेमाल नशे के लिए किया जा सकता है।