
श्रीगंगानगर.
किसानों के गांव बंद आंदोलन को प्रशासन ने कतई गंभीरता से नहीं लिया। यही वजह है कि आंदोलन के पहले ही दिन किसानों के वेश में समाजकंटकों ने कई स्थानों पर जमकर उत्पात मचाया। सुरक्षा की दृष्टि से लगाया गया पुलिस जाब्ता समाजकंटकों की गैर कानूनी गतिविधियों को देखकर भी मूक दर्शक बना रहा। पदमपुर बाइपास पर तो समाजकंटकों ने बकायदा रोडवेज और निजी बसों को रुकवाकर सवारियों के सामान की तलाशी ली और किसी यात्री के पास लीटर-दो लीटर दूध मिला तो उसे छीन लिया।
नहीं लिया गंभीरता से
किसानों के आंदोलन को प्रशासन हल्के तौर पर लिया जबकि श्रीगंगानगर, करणपुर, पदमपुर, रायसिंहनगर, श्रीबिजयनगर, सादुलशहर, अनूपगढ़ और घड़साना तहसीलों में किसान संगठन लगातार गांव बंद का प्रचार करते हुए 1 से 10 जून तक दूध और सब्जी सहित अन्य कोई भी कृषि उत्पाद शहरों में नहीं भेजने की अपील कर रहे थे। आंदोलन की अवधि और इसके कभी भी हिंसक होने की आशंका को भी प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया और कार्यपालक मजिस्ट्रेटों तक की नियुक्ति नहीं की।
आंदोलन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आमतौर कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति की जाती है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। किसानों ने शहर आने वाले मुख्य मार्गों पर नाके लगाए हैं। टकराव की संभावना को देखते हुए इन स्थानों पर कार्यपालक मजिस्ट्रेट लगाए जाने चाहिए थे परन्तु प्रशासन ने वहां पांच-सात पुलिस कर्मी तैनात कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। प्रशासन की इस व्यवस्था का फायदा किसान वेशधारी समाजकंटकों ने उठाया।
अब दिए हैं आदेश
किसानों के वेश में समाजकंटकों के उत्पात मचाने की शिकायत मिलने पर जिला कलक्टर ज्ञानाराम ने सभी तहसीलदारों और उपखंड अधिकारियों को अपने-अपने इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा दूध आदि की आपूर्ति बाधित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि आंदोलन के नाम पर छीना-झपटी और आमजन को परेशान करने की किसी को इजाजत नहीं। ऐसा करने वालों से प्रशासन सख्ती से निपटेगा।