श्री गंगानगर

उच्च शिक्षा में उपेक्षा, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज ही नहीं… क्यों

अभियान:श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ के युवाओं को चाहिए सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज

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  • श्रीगंगानगर.श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जैसे सीमावर्ती जिलों में आज भी सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना नहीं हो सकी है। इस शैक्षणिक उपेक्षा के कारण यहां के हजारों विद्यार्थी या तो उच्च शुल्क देकर निजी संस्थानों में पढऩे को मजबूर हैं या फिर सरकारी विकल्पों के लिए अन्य जिलों की ओर रुख करते हैं। सीमावर्ती जिलों की युवा प्रतिभाएं दशकों से इस सुविधा की बाट जोह रही हैं, लेकिन अब तक केवल निराशा ही हाथ लगी है। 250 किमी दूर बीकानेर में संभाग स्तरीय सरकारी कॉलेज ही एकमात्र विकल्प है, जबकि श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ के लिए पृथक कॉलेज की मांग वर्षों से उठ रही है।

निजी कॉलेजों में पढ़ाई महंगी, गुणवत्तापूर्ण विकल्प नहीं

  • इन दोनों जिलों में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं होने से विद्यार्थियों को निजी कॉलेजों का रुख करना पड़ता है, जहां बीटेक की सालाना फीस 1.50 लाख से 1.80 लाख रुपए तक होती है, और हॉस्टल का खर्च अलग। इसके विपरीत, राज्य के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में कुल 2.50 से 2.80 लाख रुपए में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर प्लेसमेंट मिल रहा है। इससे यह स्पष्ट है कि उच्च शिक्षा का ये विकल्प सिर्फ शहरी और आर्थिक रूप से सक्षम विद्यार्थियों तक ही सीमित रह गया है।

डिप्लोमा है,लेकिन इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं

  • श्रीगंगानगर में 12वीं के बाद डिप्लोमा के विकल्प तो हैं, जैसे चौधरी मालू भांभू राजकीय पॉलिटेक्निक, लेकिन बीटेक जैसी डिग्री के लिए कॉलेज की कमी सबसे बड़ी बाधा है। यहां के छात्र मजबूरी में अन्य शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।

राज्य में मौजूद हैं बेहतरीन सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज

  • राजस्थान में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों का मजबूत नेटवर्क है। अजमेर, भरतपुर, बाड़मेर, बीकानेर, धौलपुर, जोधपुर और भीलवाड़ा में न सिर्फ आधुनिक लैब और पुस्तकालय हैं, बल्कि छात्रों के समग्र विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इन कॉलेजों में तकनीकी कौशल, शोध सुविधा, और उद्योगों से जुड़ाव जैसे पहलुओं पर लगातार काम हो रहा है।

स्थानीय विशेषज्ञों की राय

  • "कई युवा प्राइवेट कॉलेजों की चकाचौंध में आकर गलत चुनाव कर लेते हैं, जिसके फलस्वरूप उन्हें मोटी फीस देने के बावजूद गहन शिक्षा और प्लेसमेंट नहीं मिल पाता। अगर जिले में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की सुविधा हो तो ये विद्यार्थियों के लिए उज्ज्वल भविष्य के रास्ते खोलेगा।" भूपेश शर्मा, एजुकेशन एक्सपर्ट, शिक्षा विभाग, श्रीगंगानगर

आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को भी बीटेक की पढ़ाई का अवसर मिलेगा

  • "सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कॉलेज की फीस में भारी अंतर है। सरकार को श्रीगंगानगर में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना करनी चाहिए। इससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को भी बीटेक की पढ़ाई का अवसर मिलेगा। यह पहल न केवल शिक्षा के स्तर को सुधारने में मदद करेगी, बल्कि तकनीकी क्षेत्र में भी विविधता लाएगी।"सरोज पंवार, इंजीनियर, श्रीगंगानगर
Published on:
08 Apr 2025 12:37 pm
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