Sri Ganganagar News: पंजाब, राजस्थान और हरियाणा के बीच लंबे समय से चल रहे अंतरराज्यीय नदी जल विवाद के समाधान को लेकर गठित ट्रिब्यूनल की गतिविधियों ने राजस्थान की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष और सदस्यों ने इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम एवं द्वितीय चरण का दौरा पूरा कर लिया है।
Sri Ganganagar News: पंजाब, राजस्थान और हरियाणा के बीच लंबे समय से चल रहे अंतरराज्यीय नदी जल विवाद के समाधान को लेकर गठित ट्रिब्यूनल की गतिविधियों ने राजस्थान की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष और सदस्यों ने इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम एवं द्वितीय चरण का दौरा पूरा कर लिया है। अब ट्रिब्यूनल अपनी रिपोर्ट तैयार कर केन्द्र सरकार को सौंपेगा, जिस पर तीनों राज्यों के बीच रावी-व्यास नदियों के अतिरिक्त जल बंटवारे को लेकर अंतिम निर्णय की दिशा तय होगी।
यदि ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान को उसके हिस्से का लगभग .60 एमएएफ अतिरिक्त पानी मिलता है, तो राज्य के विशेषकर उत्तर-पश्चिमी जिलों श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर व जैसलमेर में सिंचाई व्यवस्था को बड़ा संबल मिलेगा। अतिरिक्त पानी मिलने से कृषि क्षेत्र का विस्तार होगा, फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों को लंबे समय से चली आ रही जल संकट की समस्या से राहत मिलेगी।
रावी-व्यास नदियों के अधिशेष पानी का बंटवारा पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के बीच करने के लिए 31 दिसम्बर 1981 को समझौता हुआ था। इसके तहत राजस्थान को 8.60 एमएएफ पानी देना तय हुआ। उस समय इंदिरा गांधी नहर का सिंचाई तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं हुआ था। ऐसे में पंजाब ने 8.00 एमएएफ पानी ही राजस्थान को दिया। शेष 0.60 एमएएफ पानी सिंचाई तंत्र विकसित होने पर देने का वादा किया। इंदिरा गांधी नहर के प्रथम व द्वितीय चरण में सिंचाई तंत्र विकसित हुए कई दशक हो गए हैं। राजस्थान लगातार अपने हिस्से का शेष पानी मांग रहा है, लेकिन पंजाब नहीं दे रहा।
ट्रिब्यूनल ने 5 से 8 मार्च तक इंदिरा गांधी नहर के द्वितीय चरण में बीकानेर से जैसलमेर के मोहनगढ़ तक के दौरे में राजस्थान की ओर से नहरी पानी की मांग बार-बार उठाने के पीछे के कारणों की भी जानकारी ली। दल के सदस्यों ने देखा कि इंदिरा गांधी नहर के माध्यम से सीधे तौर पर चार जिलों को सिंचाई पानी देने के साथ ही प्रदेश के रेगिस्तानी भूभाग में 12 जिलों में बसे लाखों लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। सबसे अहम बात यह रही कि नहरी पानी की एक बूंद भी कही व्यर्थ में जाते नहीं मिली। जबकि रावी, व्यास, सतलुज का पानी लेने वाले अन्य राज्य पंजाब, हरियाणा में कई जगह पानी सेम नालों में व्यर्थ बहता है।
इंदिरा गांधी नहर के प्रथम व द्वितीय चरण के दौरे से पहले ट्रिब्यूनल के सदस्यों की नजर में इस इलाके की तस्वीर रेतीले धोरों वाली धरती के रूप में थी। ट्रिब्यूनल को किसानों के माध्यम से यह जानकारी भी मिली कि हिस्से का पानी मिल जाए तो यहां की धरती भी उतनी ही उपजाऊ है, जितनी की पंजाब और हरियाणा की।
-अमरजीत मेहरड़ा, अतिरिक्त सचिव (पश्चिम) एवं इंदिरा गांधी नहर बोर्ड के पदेन सचिव