श्री गंगानगर

राजस्थान का वो ऐतिहासिक चुनाव…जब मजाक-मजाक में इलेक्शन लड़ीं ‘बसंती’, रिकॉर्ड मतों से बनीं किन्नर पार्षद

चुनाव कोई भी हो, उसके साथ कुछ ऐसे किस्से भी जुड़ जाते हैं, जो नतीजे आने के बाद खत्म नहीं होते। बल्कि वर्षों तक लोगों की जुबान पर बने रहते हैं। साल 1994 में हुए श्रीगंगानगर के नगर परिषद चुनाव में वार्ड नंबर-23 में भी कुछ ऐसा ही हुआ था।
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'किन्नर बसंती' ने रचा था राजस्थान में जीत का सबसे बड़ा रिकॉर्ड (फोटो-एआई)

श्रीगंगानगर: चुनावी इतिहास में कुछ किस्से नतीजों के बाद भी जिंदा रहते हैं। साल 1994 के नगर परिषद चुनाव में वार्ड-23 का चुनाव ऐसा ही था। एक बैठक में मजाक-मजाक में ट्रांसजेंडर बसंती को प्रत्याशी बनाने का सुझाव आया। डेरे की मुखिया की अनुमति के बाद बसंती ने नामांकन दाखिल कर दिया। शुरुआत में लोग पूछते थे, 'इनको कौन वोट देगा' लेकिन प्रचार के दौरान बसंती घर-घर पहुंचीं। महिलाओं के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और उनका सहज अंदाज लोगों को भा गया।

चुनाव प्रचार की चर्चा देश ही नहीं, विदेशी मीडिया तक पहुंची। नतीजा आया तो मजाक इतिहास बन चुका था। बसंती ने राजस्थान में सर्वाधिक मतों के अंतर से जीत का रिकॉर्ड बनाया। यहां मतदाताओं ने ऐसा इतिहास रचा, जिसकी चर्चा शहर से निकलकर देश की सीमाओं के पार तक पहुंची। वार्ड काफी बड़ा था। कई प्रभावशाली लोग चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे।

मजाक में बोला था- बसंती को खड़ा कर देते हैं

इसी बीच एक महिला प्रत्याशी के ससुर ने चुनाव से पहले ही उसकी जीत का दावा कर दिया। हरदीप कॉलोनी के कई लोगों को यह बात नागवार गुजरी। आनन-फानन में बैठक बुलाई गई। सवाल था…उम्मीदवार किसे बनाया जाए? कई नामों पर चर्चा हुई, लेकिन सहमति नहीं बनी। तभी किसी ने मजाक में कह दिया…बसंती को खड़ा कर देते हैं।

मुखिया रामप्यारी की अनुमति लेना था जरूरी

बैठक में ठहाका गूंजा, लेकिन देखते ही देखते यही मजाक गंभीर प्रस्ताव में बदल गया। बैठक स्थल से कुछ दूरी पर रहने वाली बसंती ट्रांसजेंडर (किन्नर) थी। अगले दिन कॉलोनी के लोग उसके साथ रहने वाले पुरुष किन्नर हाजी पाल से मिले। हाजी पाल ने कहा कि डेरे की मुखिया माई रामप्यारी की अनुमति के बिना बसंती चुनाव नहीं लड़ सकती।

इसके बाद कई लोग हाजी पाल को साथ लेकर तेली मोहल्ला स्थित किन्नरों के डेरे पर पहुंचे। अपनी अर्जी माई रामप्यारी के सामने रखी। कुछ देर विचार-विमर्श के बाद माई रामप्यारी ने आशीर्वाद के लिए हाथ उठाया तो डेरे में खुशी छा गई। किन्नर नाचने लगे। माई ने साफ कहा, खर्चा जितना भी हो, मैं करूंगी। बसंती को जिताना आपको है।

सवाल था- 'इनको कौन वोट देगा'

बसंती ने नामांकन दाखिल किया तो शुरुआत में किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। शहर में एक ही सवाल था…' इनको कौन वोट देगा?' लेकिन चुनाव प्रचार शुरू होते ही तस्वीर बदलने लगी। बसंती अपनी साथी किन्नरों गौरी, काली और अन्य साथियों के साथ घर-घर पहुंचती।

महिलाओं के पैर छूकर आशीर्वाद लेती और बदले में कई घरों में महिलाएं ही किन्नरों से आशीर्वाद लेने के लिए आगे आ जातीं। उनका अनूठा प्रचार शहर में चर्चा का विषय बन गया। खबर देश के मीडिया तक पहुंची और विदेशी मीडिया में भी एक किन्नर के चुनाव लड़ने की खबरें प्रसारित हुई।

फिर आया मतदान का दिन। वोट डालने के बाद लोग वार्ड नंबर-23 के मतदान केंद्र के आसपास जुटने लगे। दोपहर तक वहां हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई। सबकी नजर एक ही सवाल पर थी…बसंती का क्या होगा? जब मतगणना पूरी हुई और परिणाम घोषित हुआ तो मजाक में शुरू हुई कहानी इतिहास बन चुकी थी। बसंती ने न केवल राजस्थान में सर्वाधिक मतों के अंतर से जीत का रिकॉर्ड बनाया, बल्कि देश की पहली किन्नर पार्षद बनने का गौरव भी हासिल किया।

Updated on:
27 Aug 2026 08:31 am
Published on:
27 Aug 2026 08:31 am