
निवर्तमान चेयरमैन विनोद अग्रवाल को बीजेपी में शामिल कराते पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी (पत्रिका फोटो)
बयाना (भरतपुर): स्थानीय निकाय चुनाव में नामांकन दाखिल होने से पहले ही बयाना की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। नगरपालिका के निवर्तमान अध्यक्ष विनोद कुमार अग्रवाल बट्टा ने कांग्रेस से नाता तोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। उनके साथ निवर्तमान उपाध्यक्ष मंजू दिनेश महलोनी, निवर्तमान अध्यक्ष की पत्नी एवं नगरपालिका की पूर्व चेयरमैन उषा अग्रवाल सहित करीब डेढ़ दर्जन निवर्तमान पार्षद और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने भी बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की।
भरतपुर के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी, जिलाध्यक्ष शिवानी दायमा और प्रभारी नरेश बंसल की मौजूदगी में बयाना से पहुंचे नेताओं और कार्यकर्ताओं का पार्टी पदाधिकारियों स्वागत किया। दोपहर बाद बयाना से करीब 50 वाहनों के काफिले के साथ पहुंचे पूर्व अध्यक्ष दंपती और उनके समर्थकों की मौजूदगी से कार्यक्रम में स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल और चर्चा तेज हो गई।
निवर्तमान अध्यक्ष के बीजेपी में शामिल होने को लेकर पिछले तीन दिनों से बयाना की राजनीति में चर्चाओं और अटकलों का दौर चल रहा था। आखिरकार बुधवार को इन चर्चाओं पर विराम लग गया। जानकारी के अनुसार, नगरपालिका के एक पूर्व पार्षद ने बीजेपी और निवर्तमान अध्यक्ष के बीच बातचीत में अहम भूमिका निभाई।
बता दें कि करीब तीन दिन पहले पूर्व पार्षद विनोद कुमार अग्रवाल बट्टा को जयपुर लेकर गए, जहां उनकी निकाय चुनावों के लिए बीजेपी के संभाग प्रभारी एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी से मुलाकात कराई गई। इसके बाद बीजेपी में शामिल होने का रास्ता साफ हुआ।
बयाना की नगरपालिका राजनीति में विनोद कुमार अग्रवाल बट्टा के बीजेपी में शामिल होने को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। उनके साथ निवर्तमान पार्षदों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के बीजेपी में शामिल होने से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की चर्चा शुरू हो गई है।
इसे आगामी निकाय चुनाव से पहले दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की तैयारियों और रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, चुनावी आचार संहिता प्रभावी होने के कारण इस घटनाक्रम को किसी दल या व्यक्ति के पक्ष में प्रचार के बजाय राजनीतिक गतिविधि और दल-बदल के रूप में ही देखा जाना उचित होगा। आगामी चुनाव में इसका वास्तविक प्रभाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
नामांकन से पहले हुए इस घटनाक्रम ने नगरपालिका के आगामी बोर्ड को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को भी तेज कर दिया है। बीजेपी के साथ स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले नेताओं और पार्षदों के जुड़ने से चुनावी मुकाबले के संभावित समीकरणों पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खास तौर पर निवर्तमान अध्यक्ष के बीजेपी में आने को आगामी बोर्ड के गठन की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि, चुनाव परिणाम आने और पार्षदों के निर्वाचित होने तक बोर्ड के गठन को लेकर किसी भी तरह का अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। फिलहाल, इतना जरूर है कि नामांकन से पहले हुए इस बड़े राजनीतिक फेरबदल ने बयाना के निकाय चुनाव को लेकर सियासी तापमान बढ़ा दिया है।
करीब डेढ़ दर्जन निवर्तमान पार्षदों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने भी इस घटनाक्रम को चर्चा का विषय बना दिया। अब निगाहें नामांकन प्रक्रिया और इसके बाद सामने आने वाले प्रत्याशियों के समीकरण पर रहेंगी।
Updated on:
26 Aug 2026 08:11 pm
Published on:
26 Aug 2026 08:11 pm
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