श्री गंगानगर

रजिस्ट्री 5 लाख की, सौदा 50 लाख का! श्रीगंगानगर की निजी कॉलोनियों में जमीन खरीद-फरोख्त पर बड़े खुलासे की संभावना

Sri Ganganagar Land Scam: श्रीगंगानगर की निजी कॉलोनियों में जमीन सौदों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। आरोप है कि 40–50 लाख रुपए में बिकने वाले भूखंडों की रजिस्ट्री 5–10 लाख रुपए में कराई जा रही है। आयकर विभाग की टीम दो साल की रजिस्ट्रियों की जांच कर रही है।
3 min read
• •
Updated: 17 Jul 2026, 3:31 PM IST
Rajasthan Sri Ganganagar Land Scam
श्रीगंगानगर के तहसील कार्यालय में दस्तावेजों की जांच करने पहुंची टीम (पत्रिका फोटो)

Rajasthan Sri Ganganagar Land Scam: श्रीगंगानगर जिले में निजी कॉलोनियों में भूखंडों की खरीद-फरोख्त को लेकर एक गंभीर सवाल उठ रहा है। कुछ कॉलोनियों में भूखंडों का वास्तविक बाजार मूल्य और रजिस्ट्री में दर्शाई गई कीमत के बीच भारी अंतर देखने को मिल रहा है। बताया जा रहा है कि भूखंडों की बिक्री में खरीदार से 40 से 50 लाख रुपए तक वसूले जाते हैं। लेकिन दस्तावेजों में भूखंड का मूल्य मात्र 5 से 10 लाख रुपए दर्शाया जाता है। इससे न केवल सरकारी राजस्व को चपत लग रही है, बल्कि काले धन के लेन-देन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, कई कॉलोनियों में भूखंडों की वास्तविक कीमत बाजार की मांग, लोकेशन और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर तय होती है। दूसरी ओर रजिस्ट्री प्रायः डीएलसी (जिला स्तरीय समिति) दरों या उसके आसपास के मूल्य पर कराई जाती है। ऐसे में वास्तविक बिक्री मूल्य और रजिस्ट्री में दर्ज राशि के बीच का अंतर अक्सर नकद भुगतान के रूप में होने की चर्चाएं रहती हैं। हालांकि, इसकी पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियां ही कर सकती हैं।

आयकर विभाग की जांच में हो सकता है बड़ा खुलासा

श्रीगंगानगर में पिछले एक दशक में रियल स्टेट का कारोबार जिस तेज से फैला है, उसे देखते हुए यह जिला आयकर विभाग के रडार पर आ गया है। अकेले श्रीगंगानगर में एक दशक के दौरान 300 के करीब छोटी-बड़ी कॉलोनियां विकसित हुई हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है। यहां भी खेल भूखंड की कीमत ज्यादा वसूलने और दस्तावेजों में कम दिखाने का खेल चल रहा है।

जयपुर से आयकर विभाग की इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिंग विंग की टीम इसी खेल की परतें उघाड़ने के लिए तीन दिन से उप रजिस्ट्रार कार्यालय में डेरा डाले हुए है। टीम पिछले दो साल में हुई रजिस्ट्रियों की जांच कर रही है। दरअसल, देशभर में रियल स्टेट के कारोबार में सरकारी कोष को नुकसान पहुंचाने का खेल चल रहा है।

केंद्र सरकार ने इसी को ध्यान में रखकर 30 लाख से ऊपर की रजिस्ट्रियों में पेन कार्ड सहित अन्य दस्तावेज फर्जी लगाने तथा दो लाख से ऊपर की रजिस्ट्रियों में भुगतान चेक के बजाय नकद में होने की जांच करने के निर्देश आयकर विभाग को दिए हैं। यहां आई टीम इसी की जांच कर रही है। जांच में अगर टैक्स चोरी, फर्जी दस्तावेज या संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के सबूत मिले तो संबंधित के खिलाफ आयकर अधिनियम सहित अन्य प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई होगी।

खरीदार भी जोखिम में

भूखंडों की खरीद में नकद भुगतान करने वाले खरीदार भी जोखिम से अछूते नहीं रहते। भविष्य में किसी विवाद, कब्जे के झगड़े या कानूनी मामले में उनके पास केवल वही राशि प्रमाणित होती है, जो रजिस्ट्री में दर्ज है। यदि वास्तविक भुगतान उससे कहीं अधिक किया गया हो तो उसे साबित करना कठिन हो सकता है।

सरकार को दोहरा नुकसान

रजिस्ट्री में कम मूल्य दर्शाने से राज्य सरकार को स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क के रूप में कम राजस्व प्राप्त होता है। वहीं, आयकर विभाग के लिए भी वास्तविक लेन-देन का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। यदि बिक्री मूल्य और घोषित मूल्य में बड़ा अंतर हो तो यह कर चोरी के दायरे में भी आ सकता है।

निवेश पर भी नजर

श्रीगंगानगर के मामले में आयकर विभाग की नजर रियल स्टेट के कारोबार में हुए अरबों रुपए के निवेश पर भी नजर है। यह पैसा कहां से और किन स्रोतों से आ रहा है, यह बड़ा सवाल है। यहां के रियल स्टेट कारोबार में बॉलीवुड के निवेश की भी चर्चा होती रहती है।

जांच और निगरानी की जरूरत

शहर में लगातार विकसित हो रही निजी कॉलोनियों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या भूखंडों की वास्तविक बिक्री कीमत और रजिस्ट्री में दर्ज कीमत के बीच के अंतर की समय-समय पर समीक्षा की जा रही है? विशेषज्ञों का मानना है कि उप-पंजीयक कार्यालय, आयकर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की ओर से बड़े अंतर वाले सौदों की जांच से पारदर्शिता बढ़ सकती है।

बड़ा सवाल यह है

श्रीगंगानगर में तेजी से बढ़ रहे रियल एस्टेट कारोबार के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि भूखंड का वास्तविक सौदा 40 से 50 लाख रुपए में हो रहा है तो दस्तावेजों में उसकी कीमत 5 से 10 लाख रुपए क्यों दिखाई जा रही है? और यदि ऐसा हो रहा है तो इस अंतर की राशि का हिसाब किसके पास है? यह ऐसा मुद्दा है, जिस पर प्रशासनिक और वित्तीय एजेंसियों की नजर जरूरी मानी जा रही है।

Updated on:
17 Jul 2026, 3:31 PM IST
Published on:
Also Read
View All
मरुभूमि में सतलुज का पानी लाना नहीं था आसान, महाराजा गंगासिंह का वह कदम जिसने बदल दी पश्चिमी राजस्थान की तस्वीर

Sri Ganganagar: सेंट्रल जेल में बंद बेटे से मिलने जेल पहुंचा पिता, जूतों में छिपाकर लाया टैबलेट और सफेद पाउडर; ऐसे हुआ खुलासा

श्रीगंगानगर में पदमपुर तहसील का पेशकार सस्पेंड, रिश्वत लेने का वीडियो वायरल होने पर एक्शन

Rajasthan Panchayat Elections : पंचायत चुनाव का बदला मिजाज, पहले थी जुबान की कीमत, अब हाईटेक प्रचार का दौर

श्रीगंगानगर: पानी लाती हैं पड़ोस से, फिर भी बुजुर्ग विधवा महिला को थमा दिया हजारों रुपए का बिल; घर में कनेक्शन तक नहीं