मोबाइल एप तक सीमित रह गया अभियान, वास्तविक निरीक्षण नहीं बिंदुओं पर उजागर हुई खामियां, अधिकारियों पर सख्ती के संकेत
श्रीगंगानगर.राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी शाला संबलन अभियान की जमीनी हकीकत नवंबर 2025 में सामने आई है। कागजों और मोबाइल एप में मजबूती दिखाने वाला यह अभियान वास्तविक धरातल पर अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सका। नवंबर माह में विद्यालय अवलोकन का निर्धारित लक्ष्य की तुलना में राज्यभर में औसतन 64.20 प्रतिशत ही पूरा हो पाया। सबसे चिंताजनक स्थिति श्रीगंगानगर जिले की रही, जहां प्रगति मात्र 54.02 प्रतिशत रही। इस कमजोर प्रदर्शन पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे अधिकारियों की लापरवाही और कमजोर मॉनिटरिंग का परिणाम बताया है।
शाला संबलन अभियान के तहत संभाग, जिला, ब्लॉक, पीईईओ और यूसीईईओ स्तर के अधिकारियों को राजशाला संबलन मोबाइल एप के माध्यम से प्रत्येक माह विद्यालयों का अवलोकन करना अनिवार्य था। निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों को एप पर टिकिट के रूप में दर्ज कर तय समय-सीमा में समाधान सुनिश्चित करना था। इसके लिए समय-समय पर बैठकें, वीडियो कॉन्फ्रेंस, दूरभाष निर्देश और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से लगातार अनुस्मारक भेजे गए। बावजूद इसके, न तो समय पर विद्यालय अवलोकन हुआ और न ही जारी टिकिट्स का समाधान किया गया।
ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि कई विद्यालयों में अधिकारी पहुंचे ही नहीं, और जहां पहुंचे वहां औपचारिक निरीक्षण कर एप में प्रविष्टि भर दी गई। परिणामस्वरूप वास्तविक समस्याएं जस की तस बनी रहीं। संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा) कार्यालय ने माह के प्रथम सप्ताह में ही लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर निगरानी की कमी साफ नजर आई।
टिकिट्स वाइज स्टेटस रिपोर्ट में कुल 36 बिंदुओं पर गंभीर खामियां सामने आई हैं। कक्षा 9 से 12 तक कई कक्षा-कक्षों में टाइम टेबल चस्पा नहीं मिला। खाद्य पदार्थों का रख-रखाव अव्यवस्थित पाया गया। प्रयोगशालाओं में कंप्यूटर खराब पड़े हैं, लेकिन मरम्मत नहीं हुई। पुस्तकालयों में पुस्तकें उपलब्ध होने के बावजूद विद्यार्थियों तक नहीं पहुंचीं। स्टोरेज टैंक की सफाई न होने से स्वच्छता पर सवाल खड़े हुए। वहीं कक्षा 3 से 8 तक शिक्षकों द्वारा समय पर रिमेडिएशन वर्कबुक की जांच नहीं की गई और कई विद्यालयों में मिड-डे मील भी निर्धारित पात्रता के अनुरूप नहीं मिला। यह स्थिति बताती है कि शाला संबलन अभियान फिलहाल मोबाइल एप तक सीमित रह गया है। विभागीय स्तर पर अब सख्ती के संकेत हैं और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
नवंबर 2025 का लक्ष्य: 100
राज्य की औसत प्रगति: 64.20 प्रतिशत
श्रीगंगानगर की प्रगति: 54.02 प्रतिशत
टिकिट्स के बिंदु: 36
शाला संबलन अभियान में प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही है। अधिकारियों को विद्यालय अवलोकन और टिकिट्स के समाधान में गंभीरता बरतनी होगी। लापरवाही पर जवाबदेही तय की जाएगी।
गिरजेशकांत शर्मा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, श्रीगंगानगर।