
-गन्ना उत्पादकों की 1954 में शुरु हुई समस्याओं के समाधान की मुहिम, समाधान फिर भी नहीं
रायसिंहनगर. इलाके में किसी समय हर खेत में बोई जाने वाली गन्ने की फसल से अब किसानों का मोह भंग हो रहा है। धीेर-धीरे गन्ने के खेत कम होते जा रहे है। दो दशक पूर्व तो लगभग हर खेत में गन्ने की फसल चाव से बोई जाती थी। उतना ही चाव लोगों में खेतों में ही तैयार किए जाने वाले गुड़ व गन्ने के रस को लेकर था। लेकिन गन्ना उत्पादक काश्तकारों को गन्ने की फसल से लगातार हो रहे नुकसान के चलते अब किसान गन्ने से दूरी बनाने लगे हैं।
रायसिंहनगर इलाके में हर खेत की शोभा माना जाने वाला गन्ना इस बार मुश्किल से आधा दर्जन गांवों में ही दिखाई दे रहा है। गन्ना उत्पादक किसानों की समस्याओं की अनदेखी के चलते अब किसान इसमें रुचि नहीं दिखा रहे। यही वजह है कि अब इलाके में गन्ना अंतिम छोर पर बसे आरबी क्षेत्र के गांवों संगराणा, 22 आरबी, 21 आरबी, 25 आरबी, काकू सिंहवाला इलाके में ही मिलता है।
अन्य इलाकों में घरेलु उपयोग के लिए भले ही खेतों में एकाध क्यारी में गन्ना उगा लिया जाता है। लेकिन व्यापारिक तौर पर गन्ना नहीं उगाया जा रहा। खुद कृषि विभाग इस बात को स्वीकार कर रहा है कि गन्ने का क्षेत्रफल लगातार गिर रहा है। रायसिंहनगर क्षेत्र में इस साल मात्र 275 हैक्टेयर भूमि में ही गन्ना की बिजाई हुई है।
-1954 में ही शुरु हो गया था संघर्ष
गन्ना उत्पादक किसानों की समस्याएं नई नहीं है। ये काश्तकार दशकों से अपनी लड़ाई लड़ते आ रहे है लेकिन हर वक्त अनदेखी का ही शिकार हो रहे है। पहली बार 1955 में हनुमानगढ जिले के मक्कासर निवासी गन्ना उत्पादक काश्तकार एवं बाद में सांसद बने श्योपत सिंह मक्कासर गन्ना उत्पादक किसानों की समस्या लेकर प्रशासन के पास पहुंचे थे।
उस समय की विपरीत परिस्थितियों में भी हनुमानगढ जिले में गन्ना उत्पादकों को बीज श्योपत सिंह के पास ही उपलब्ध होता था। श्योपत सिंह खुद अपने समय में गन्ना उत्पादक काश्तकार रहे है। तब से अब तक गन्ना उत्पादकों की समस्याएं कम होने की बजाय बढ़ी ही है। यही वजह है कि श्रीगंगानगर व हनुमानगढ जिलों में बहुतायत में होने वाली गन्ने की खेती सिमट गई है। इस बार भी शुगर मील में पिराई समय पर शुरु नहीं होने से गन्ना खेतों में ही खराब हो रहा है। दूसरा नहरी पानी की कमी के कारण गन्ना समय से पहले सूख गया है।
-किसानों की रुचि हो रही है कम
इलाके में गन्ना उत्पादक किसानों ने गन्ने के उत्पादन में रुचि लेना कम किया है, समय पर सुविधाएं नहीं मिलने से किसान गन्ने की बजाय अन्य फसलों में रुचि ज्यादा दिखा रहे है।..............-पृथ्वीराज, सहायक कृषि निदेशक, कृषि विस्तार रायसिंहनगर