श्री गंगानगर

Sri Ganganagar: सूरतगढ़ उपकारागार में सलाखों के पीछे संगीत का सहारा, बंदियों के तनाव को कम कर रही नई पहल

Jail Reform Initiative: सूरतगढ़ उपकारागार में विचाराधीन बंदियों के मानसिक तनाव को कम करने और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए हारमोनियम, ढोलक, मंजीरा और झांझर सहित विभिन्न संगीत वाद्य यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं।

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Music Therapy in Suratgarh Sub Jail
सूरतगढ़ उपकारागार में बंदियों का पुनर्वास, पत्रिका फोटो

Jail Reform Initiative: सूरतगढ़ उपकारागार में विचाराधीन बंदियों के मानसिक तनाव को कम करने और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए हारमोनियम, ढोलक, मंजीरा और झांझर सहित विभिन्न संगीत वाद्य यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं। अब शाम के समय बंदी भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समय बिता रहे हैं।

दरअसल, कारागार महानिदेशक के निर्देश पर प्रदेश के सभी 53 उपकारागारों में संगीत वाद्य यंत्र उपलब्ध करवाए गए हैं। इसका उद्देश्य विचाराधीन बंदियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना, उनके मानसिक तनाव को कम करना और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। अधिकारियों का मानना है कि संगीत न केवल मन को शांति देता है, बल्कि व्यक्तित्व विकास और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देता है।

श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ उपकारागार में भी इन दिनों शाम होते ही माहौल भक्तिमय हो जाता है। बंदी हारमोनियम और ढोलक की संगत में भजन-कीर्तन, देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से समय बिता रहे हैं।

भजनों में मिल रही मानसिक शांति

उपकारागार में वर्तमान में करीब 101 विचाराधीन बंदी हैं, जिनमें अधिकांश एनडीपीएस एक्ट से जुड़े मामलों में निरुद्ध हैं। बंदियों का कहना है कि वाद्य यंत्रों के साथ भजन गाने और भगवान का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है। उनका मानना है कि इस पहल से तनाव कम होगा और सकारात्मक सोच विकसित होगी। शाम के समय संगीत की मधुर धुनों से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में बदल जाता है। उपकारागार में संगीत वाद्य यंत्र उपलब्ध होने के अब कारागार के बंदियों में उत्साह है और शाम होते ही अधिकांश बंदी नियमित होने वाली भजन संध्या में उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास

उपकारागार प्रशासन पहले से ही बंदियों के लिए पुस्तकों की व्यवस्था कर रहा है। अब संगीत वाद्य यंत्रों की सुविधा मिलने से उन्हें रचनात्मक गतिविधियों का एक नया माध्यम मिला है। उपकारापाल नरेश कुमार शुक्ला एवं मुख्य प्रहरी अरविन्द्र रिणवां ने बताया कि संगीत गतिविधियों से बंदियों को मानसिक तनाव से राहत मिलेगी तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।
उनका कहना है कि यह पहल बंदियों के सुधार और पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। बंदियों को अपराध की राह छोड़ने के लिए भी जेल प्रशासन के स्तर पर प्रेरित किया जा रहा है।

Updated on:
08 Jun 2026 01:56 pm
Published on:
08 Jun 2026 01:39 pm