- पांच वर्षीय बालक प्रांजल के अपहरण की तरह ही हुआ रुद्र का अपहरण
श्रीगंगानगर. रामदेव कॉलोनी के बालक रुद्र शर्मा के अपहरण के जैसी ही घटना बीस साल पहले विनोबा बस्ती में हो चुकी हैं। इस परिवार को जब रुद्र के अपहरण की जानकारी मिली तो परिवार के सामने अतीत जिंदा हो गरा। अपहरण की घटना का जिक्र होते ही उसके परिजन विचलित हो उठते है। प्रांजल की मां पिंकी कपूर के अनुसार 2 अगस्त 2005 की रात आठ या साढ़े आठ बजे अपहरण हुआ था और करीब तीस या चालीस मिनट के उपरांत अपहरर्ताओं ने घर पर लगे फोन पर कॉल करके पांच लाख रुपए फिरौती मांगी थी। अपहरण की घटना से लेकर अगले दिन 3 अगस्त सुबह साढ़े आठ बजे तक करीब करीब बारह घंटे परिजन संकट से घिरे रहे। घर का एरिया पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था। उस वक्त बेसिक फोन ही ज्यादा थे। इस कारण घटना को लेकरबार बार फोन आ रहे थे और लोग उनके घर आ रहे थे।
विनोबा बस्ती में 2 अगस्त 2005 की शाम समय करीब साढ़े या आठ बजे, घर के बाहर पांच वर्षीय प्रांजल कपूर अपने हमउम्र के बच्चों के साथ रोजाना की तरह गली में खेलने में मशगूल था। इतने में बाइक सवार दो युवक आए। इसमें एक ने इन चार-पांच बच्चों से प्रांजल का नाम पूछा तो यह बालक हंसते और मुस्कराते हुए बोला, अंकल मैं हूं प्रांजल। इस पर शख्स ने उसके पापा का नाम दीपक बताया तो प्रांजल ने सिर हिलाते हुए हामी भरी। शख्स ने बोला कि आपके पापा ने टॉफी देने के लिए अपनी दुकान पर बुलाया है। यह सुनकर बच्चा खुश होकर दोनों युवकों की बाइक पर बैठ गया। कुछ देर बाद जब इस बच्चे की मां पिंकी ने संभाला तो बच्चा नहीं था। उसके साथ खेल रहे बच्चों ने बताया कि प्रांजल तो अपने पापा की दुकान पर किसी अंकल के साथ गया है। इतने में अपनी दुकान से पैदल घर आए दीपक कपूर ने किसी व्यक्ति को प्रांजल को बुलाने की बात नहीं कही थी। पूरा परिवार बच्चे को ढूंढने में जुट गया। रात करीब सवा नौ बजे अपहरर्ताओं ने उसके घर पर लगे बेसिक फोन पर कॉल की थी, तब बोले कि प्रांजल का अपहरण हमने किया है और पांच लाख रुपए की फिरौती मांगी। यह सुनते ही कोहराम मच गया। बालक रुद्र शर्मा और प्रांजल कपूर के अपहरण करने का तरीका एक जैसा ही निकला।
प्रांजल अपहरणकांड में अपहऱर्ताओं ने करीब एक महीने तक रैकी की थी। बालक विनोबा बस्ती के स्कूल में पढ़ता था।उसकी मां ने उसे वहा से हटाकर एल ब्लॉक में संचालित दूसरे स्कूल में एडमिशन कराया। ऐसे में अपहरणकर्ताओं ने बालक को स्कूल से किडनैप की प्लानिंग बदलकर उसे घर के आगे से उठाने की साजिश रची। प्रांजल के दादा उस समय आयकर विभाग में अफसर थे, इस कारण अपहरर्ताओं ने मोटी रकम वसूली के लिए यह पूरा खेला था।
कोतवाली प्रभारी रहे सहदेव कड़वासरा और एडिशनल एसपी रहे रवि गौड़ ने अपहरर्ताओं पर इतना अधिक दबाव बनाया कि उन्होंने इस बालक को पुरानी आबादी धींगड़ा स्ट्रीट पर छोड़ कर चले गए। एक दुकानदार ने पत्रिका में बालक की बड़ी फोटो और विशेष स्टोरी देखी तो वहां रो रहे प्रांजल को अपने पास बुलाया और उसके पापा के फोन नम्बर की जानकारी लेकर कॉल की। इसके बाद पुलिस और परिजन वहां पहुंचे और प्रांजल को सकुशल घर ले आए। पुलिस अफसरों की टीम जब विनोबा बस्ती स्थित कपूर के घर आई तो लोगों ने पुलिस पर पुष्पवर्षा की थी।