
श्रीगंगानगर.
पेट्रोल, दवा,चिकित्सा,खाद्य सामग्री आदि पदार्थों को आपातकालीन सेवाओं में शामिल किया गया है, ऐसे में जिला प्रशासन को ऐसी सेवाओं के लिए चौबीस घंटे उपलब्ध रखना जरूरी है। लेकिन जिला मुख्यालय पर पेट्रोल पंप संचालकों की इतनी मनमानी कि रात ग्यारह बजे के बाद किसी को भी पेट्रोलियम पदार्थ नहीं मिलता। हमारा शहर अंतरराष्ट्रीय एवं अंतरराज्यीय सीमा पर स्थित होने और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा होने के कारण भी आपातकालीन सेवाओं की महत्ता बढ़ जाती है। पंप संचालकों की मनमर्जी को देखते हुए लगता है कि जिला प्रशासन की उन्हें परवाह नहीं। यही कारण है कि पंप संचालक निरकुंश हो रहे हैं, यह कहना है विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों का।
इन नागरिकों की माने तो संबंधित पंप संचालकों से समझाइश करनी होगी। अन्यथा उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन पंप संचालकों के साथ-साथ दूसरे दुकानदार भी करने लग जाएंगे।
गांव जाने वाले राहगिरों को पेट्रोल पंप बंद होने के कारण अधिक असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। कई पंप रात साढ़े नौ बजे बंद हो जाते है। कुछ पंपों पर रात ग्यारह के बाद प्रति लीटर तीन रुपए अतिरिक्त वसूली की जाती है।
रोशन लाल सिकरी, अध्यक्ष राम नाम सेवा संस्थान
जिला रसद विभाग इस मामले में चाहे तो तत्काल कार्रवाई कर सकता है।
एडीएम प्रशासन के पास डीएसओ का चार्ज होने के बावजूद वे कार्रवाई करने लिए हिम्मत नहीं जुटा रहे। प्रशासन सख्त कार्रवाई करें।
सोहन नायक, प्रदेश सदस्य, कांग्रेस आईटी सैल
रात को पेट्रोल पंप बंद होने से आमजन परेशानी में है। पंप संचालकों की मनमर्जी रोकने के साथ-साथ प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था के लिए ऑटोमेटिक पंप बना दे ताकि ग्राहकों को एटीएम की तरह पेट्रोल-डीजल उपलब्ध हो जाए।
मुकेश गोदारा, पूर्व अध्यक्ष छात्र संघ
जिला मुख्यालय पर कम से कम एक
पंप पर पेट्रोल-डीजल की सुविधा होनी चाहिए। अब वह जमाना गया जब रात आठ बजे के बाद उपभोक्ता सीमित संख्या में आते थे। चौबीस घंटे सुविधा का अधिकार प्रत्येक उपभोक्ता को है।
रफीक चोपदार, जागरूक नागरिक