दुनिया की सबसे रहस्यमयी और चमत्कारी जगहों में से एक है मुम्बई की हाजी अली दरगाह। ये दरगाह दक्षिणी मुंबई के वर्ली इलाके से लगभग 500 गज दूर अरब सागर में स्थित एक टापू पर एक पवित्र जगह है जिसे हाजी अली की दरगाह के नाम से जानते है। इस दरगाह में आने वाला कोई भी शख्स खाली हाथ नहीं लौटता है।
मुंबई के वर्ली तट से कम से कम 500 गज दूर अरब सागर के बिच एक छोटे से टापू पर स्थित 4500 वर्ग मीटर क्षेत्र फल में फैली यह रहस्यमयी और चमत्कारी हाजी अली दरगाह विश्व के उन चुनिंदा धार्मिक स्थलों में से एक है जहा पर सभी धर्म के लोग धागा बांदकर अपनी मंनत मांगते है। हाजी अली दरगाह की जहां समंदर की लहरें चाहें कितनी भी उफान पर हों, लेकिन यह दरगाह कभी नहीं डूबती। ये दरगाह बाकी सभी से अलग और खास है। लोग इसे चमत्कारी दरगाह कहते हैं।
ये दरगाह समुद्र में बनी हुई है जहां तक पहुंचने के लिए लोगों को समुद्र की बड़ी बड़ी लहरों से होकर गुजरना पड़ता है। यही बात इसे सबसे अलग और चमत्कारी बनाती है। ये दरगाह समुद्र में उफान आने के बाद भी ये कभी नहीं डूबती। लोगों का कहना है कि इस दरगाह पर अल्लाह कि मेहर है, तभी तो कोई भी यहां से खाली नहीं लौटता है। Nashik News: राष्ट्रगान के दौरान दिल का दौरा पड़ने से पूर्व सैनिक की मौत, अमृत महोत्सव कार्यक्रम में हुए थे शामिल; देखें वीडियो
जानें हाजी अली दरगाह का रहस्य: बाबा हाजी अली शाह बुखारी की यह दरगाह हमेशा से ही रहस्य के घेरे में घिरी रही है।
आज तक यहां तूफान और लहरें इस दरगाह का कुछ भी नहीं कर पाए है इस रहस्य को और भी गहरा बनाता है दरगाह तक जाने वाला सीमेंट का मात्र एक रास्ता, जो समुद्र में ज्वार आने के समय पूरी तरफ से डूब जाता है और दरगाह को बंद करना पड़ता है।
हैरानी की बात यह है की ज्वार में उठी पानी की इतनी उची लहरों की एक बूंद भी दरगाह के अंदर नहीं जाती है हर सुबह सूर्य उदय से पहले दरगाह के रास्ते से पानी निचे उतर जाता है लेकिन जैसे ही रात होता है तो पूरा रास्ता पानी में डूब जाता है।
इस दरगाह को हर रोज सुबह से शाम तक ही खोला जाता है शुक्रवार के दिन यहा पर मुसाफिरों की काफी मात्रा में भीड़ रहती है।
मां को लिखे पत्र में माफी मांगी: हाजी अली ट्रस्ट के मुतीबित हाज़ी अली उज़्बेकिस्तान के बुखारा से पूरी दुनिया का सैर करके भारत पहुंचे थे। जबकि की लोगों का कहना है कि हाजी अली शाह बुखारी अपने भाई के साथ भारत घूमने आए और मुंबई के वर्ली में रहने लगे। कुछ समय बाद जब उनके अपने घर लौटने का समय हुआ तब वापस जाने के बजाए उन्होंने अपनी मां को नाम एक पत्र भेजा। इस पत्र में माफी मांगते हुए उन्होंने लिखा था कि अब वह मुंबई में रहकर इस्लाम का प्रचार-प्रसार करेंगे, लोगों को इस्लाम की शिक्षा देकर उन्हें जागरूक करेंगे। फिर मक्का की तीर्थ यात्रा से पहले अपने सारे धन का त्याग कर दिया था। यात्रा के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी, उनका अंतिम संस्कार भी वहीं किया जाना था। लेकिन माना जाता है कि अरब सागर में तैरते हुए उनके शव का ताबूत मुंबई आ गया था।
लोगों का कहना हैं कि मौत के बाद उनके शरीर को एक ताबूत में रखा गया और उसे समुद्र में बहा दिया गया। ये ताबूत बहते हुए मुंबई में इसी जगह वापस आ गया था। एक दूसरी मान्यता के मुताबिक, इसी जगह संत हाजी अली के डूब जाने से उनकी की मौत हो गयी थी। इसीलिए उनके अनुयायियों ने उनकी याद में, यहां पर इस खूबसूरत दरगाह का निर्माण किया।
पहला चमत्कार: कहा जाता है कि एक बार पीर हाजी अली शाह उज़बेकिस्तान के बुख़ारा में एक वीरान जगह में बैठकर नमाज़ पढ़ रहे थे। तभी एक महिला वहां से रोते हुए गुजर रही थी। पीर के पूछने पर उसने बताया कि वो तेल लेने गई थी, लेकिन बर्तन से तेल गिर गया जिसकी वजह से उसका पति उसे अब मारेगा। ये सुनकर पीर महिला को उसी जगह ले गए। जहां तेल गिरा था। उन्होनें उससे बर्तन लिया और हाथ का अंगूठा ज़मीन में घुसा दिया। उसी समय जमीन से तेल का निकला और बर्तन तेल से भर गया।
दूसरा चमत्कार: बता दें कि दूसरी चमत्कारी घटना 26 जुलाई 2005 थी। जब मुंबई में भयंकर बाढ़ आ गई थी। जिसमें कई घरों और इमारतों को बहुत नुकसान हुआ था। लेकिन इस दौरान दरगाह को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचा। इसी तरह सुनामी के दौरान भी जब लाखों लोग मारे गये। तब भी समुद्र के बीच इस पवित्र दरगाह को कोई नुकसान नहीं हुआ था।