सुकमा

PM Awas Yojana: नक्सल राह छोड़ विकास की ओर लौटे मड़कम सोमडू, पीएम आवास से बदली जिंदगी

PM Awas Yojana Beneficiary: सुकमा के छिंदगढ़ ब्लॉक के मड़कम सोमडू ने नक्सल राह छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की। पुनर्वास नीति और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें नया घर मिला।

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Apr 09, 2026
प्रधानमंत्री आवास योजना से बदली जिंदगी (photo source- Patrika)

PM Awas Yojana: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापना और मुख्यधारा से जुडऩे के लिए शासन की पुनर्वास नीति के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। जनपद पंचायत छिंदगढ़ के ग्राम हमीरगढ़ निवासी मडक़म सोमडू की कहानी इसका प्रेरणादायक उदाहरण है, जिन्होंने भय और अनिश्चितता से भरे जीवन को छोड़कर आज सम्मानजनक जीवन की ओर कदम बढ़ाया है।

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PM Awas Yojana: सरकार के प्रति जताया आभार

मड़कम सोमडू ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहयोग ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। मड़कम सोमडू की यह कहानी बताती है कि सही नीति, प्रशासनिक सहयोग और सुदृढ़ इच्छाशक्ति से न केवल एक व्यक्ति, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

जंगल से मुख्यधारा तक का सफर

मड़कम सोमडू पूर्व में नक्सल संगठन से जुड़े हुए थे, जहां उनका जीवन हमेशा खतरे और तनाव से भरा रहता था। न स्थायी घर था, न भविष्य की कोई दिशा। लेकिन शासन की पुनर्वास नीति ने उनके भीतर नई उम्मीद जगाई और उन्होंने साहस दिखाते हुए आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

अब पक्के घर में सुरक्षित जीवन

प्रशासन की सतत निगरानी और तकनीकी सहयोग से आवास निर्माण कार्य समय पर पूर्ण हुआ। आज मडक़म सोमडू अपने परिवार के साथ एक सुरक्षित और पक्के घर में जीवन यापन कर रहे हैं। भावुक होकर उन्होंने कहा—‘‘पहले हर दिन डर और अनिश्चितता थी, आज अपने घर में सुरक्षित और सम्मान के साथ जी रहे हैं। यह सब शासन और प्रशासन की मदद से संभव हुआ।’’

PM Awas Yojana: पुनर्वास से मिली नई शुरुआत

आत्मसमर्पण के बाद जिला प्रशासन ने उन्हें विभिन्न योजनाओं से जोडक़र जीवन को स्थिरता देने की पहल की। प्रशासन के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत उनकी पत्नी रीना के नाम से आवास स्वीकृत किया गया। इसके लिए तीन किश्तों में 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास नीति का असर

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग, विशेषकर सुकमा और इसके अंतर्गत आने वाले छिंदगढ़ जैसे क्षेत्र लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे हैं। यहां के कई ग्रामीण भय, असुरक्षा और विकास की कमी के बीच जीवन जीने को मजबूर थे। ऐसे हालात में राज्य सरकार की पुनर्वास नीति ने एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में काम किया है।

Published on:
09 Apr 2026 11:13 am
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