सुल्तानपुर

सरकार! ऐसे कैसे पढ़ेंगी बेटियां? जुमला साबित हो रहा ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा

EXclusive : छात्राओं को स्कॉलरशिप देने के लिये सरकार के पास पर्याप्त फंड ही नहीं...
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Updated: 9 Oct 2018, 5:56 PM IST
beti bachao beti padhao slogan
सरकार! ऐसे कैसे पढ़ेंगी बेटियां? जुमला साबित हो रहा 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का नारा

राम सुमिरन मिश्र
सुलतानपुर. सरकार के 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' नारे को भाजपा संगठन के साथ प्रशासन भी खूब प्रचारित कर रहा है। लेकिन सुलतानपुर में यह नारा केवल जुमला ही साबित हो रहा है। आखिर कैसे पढ़े बेटियां? जब छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए सरकार के पास फण्ड ही नहीं है। ऐसे समय में जब एससी एसटी एक्ट पर केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा लिए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद जहां सवर्ण मतदाताओं में नाराजगी बढ़ी है, वहीं सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति से मरहूम रखकर उनकी बची-खुची आशाओं पर तुषारापात भी कर दिया गया है।

डीएलएड द्वितीय वर्ष के लिए छात्रवृत्ति का आवेदन कर रहे छात्र-छात्राओं में नाराजगी देखी गयी। छात्राओं का कहना है कि बेटियां कैसे पढ़ें, जब सरकार स्कालरशिप ही नहीं दे सकती। स्कालरशिप केवल अनुसूचित जाति एवं पिछड़ी जाति के छात्र- छात्राओं को ही दी गयी है। सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राएं समाज कल्याण विभाग का चक्कर लगाते हैं तो उन्हें यह बताया जाता है कि सामान्य के छात्र-छात्राओं के लिए सरकार द्वारा कोई फण्ड नहीं दिया गया। डीएलएड का प्रथम वर्ष बीत गया। द्वितीय वर्ष में प्रवेश होना है। पूरे जिले में डीएलएड सत्र 2017-18 के प्रथम वर्ष में केवल अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को ही पूरी स्कालरशिप व शुल्क प्रति की धनराशि प्राप्त हुई है। पिछड़ी जाति के कुछ छात्र-छात्राओं को पूरी तो किसी को आधी तो किसी को दो हजार या इक्कीस सौ धनराशि भेजकर सबका साथ सबका विकास के दावे को पूरा कर दिया। वहीं, सामान्य वर्ग के कुछ जुगाड़ू किस्म के इक्का दुक्का छात्र-छात्राएं समाज कल्याण विभाग में पैठ बनाकर स्कालरशिप प्राप्त करने में सफल हो गये।

छलका छात्र-छात्राओं का दर्द
एनबीएस इन्टर कॉलेज भादा के छात्र विजय बहादुर ने बताया कि पिछले साल भी छात्र-छात्राओं को स्कालरशिप नहीं मिली थी। इंटर की छात्रा शिवानी ने बताया कि सरकार यह तो कहती है 'पढ़ें बेटियां-बढ़ें बेटियां' लेकिन बेटियों को स्कालरशिप नहीं मिल पा रही है, जिसके चलते छात्राओं की शिक्षा बाधित हो रही है।

अभिभावक बोले- कैसे पढ़ें बेटियां
जिले के कुतुबपुर निवासी जय प्रकाश तिवारी कहते हैं कि छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति में मिली धनराशि की बदौलत ही तमाम छात्र-छात्राएं आगे की कक्षाओं में प्रवेश ले पाते हैं। लेकिन सूबे की योगी सरकार दावे तो बड़े लम्बे-चौड़े करती है, लेकिन लेकिन छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए बजट की व्यवस्था नहीं कर सकी है। ऐसे में विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई का मार्ग कंटकमय हो गया है।

कॉलेज प्रबंधक का बयान
गनपत सहाय पीजी कॉलेज के प्रबंधक ओम प्रकाश पांडेय ने बताया कि शासन द्वारा बजट उपलब्ध नहीं कराने के कारण छात्र-छात्राओं की शिक्षा में बाधा उत्पन्न हो रही है।

जिला समाज कल्याण अधिकारी बोले- बजट ही नहीं
जिला समाज कल्याण अधिकारी आरवी सिंह ने बताया कि यह सही है कि बजट के अभाव में छात्रों-छात्राओं को स्कालरशिप नहीं दी जा सकी है। विशेष कर सामान्य छात्र-छात्राओं को। इसके अलावा पिछड़े वर्गों के छात्र-छात्राओं को भी स्कालरशिप नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि यदि सभी छात्र-छात्राओं को स्कालरशिप देना हो तो करीब 50 करोड़ रुपए का बजट आना चाहिए। बजट के लिए शासन को लिखा गया है।


वीडियो में देखें- क्या बोले- जिला समाज कल्याण अधिकारी आरवी सिंह...

Updated on:
9 Oct 2018, 5:56 PM IST
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