हिस्ट्रीशीटर जितेन्द्र सिंह मुन्ना को आजमगढ़ जेल से सुलतानपुर में शिफ्ट करने का आदेश, अदालत ने लिया फैंसला
सुलतानपुर. हिस्ट्रीशीटर जितेन्द्र सिंह उर्फ मुन्ना के खिलाफ चल रहे हत्या के मुकदमें में हाईकोर्ट के डायरेक्शन को दृष्टिगत रखते हुए एडीजे सप्तम की अदालत ने उसे आजमगढ़ जेल के बजाय स्थानीय जिला कारागार में अग्रिम आदेश तक शिफ्ट करने के लिए आदेशित किया है। सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार यादव ने यह फैंसला मामले का शीघ्र विचारण होने में आने वाली बाधा को रोकने के मद्देनजर लिया है।
मालूम हो कि कोतवाली नगर क्षेत्र के रामनगर कोट निवासी हिस्ट्रीशीटर जीतेन्द्र सिंह मुन्ना समेत अन्य के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में मुकदमा अपर जिला जज सप्तम की अदालत में चल रहा है। जिसके शीघ्र निस्तारण के लिए अभियोजन पक्ष की मांग पर हाईकोर्ट ने आदेश भी पारित किया है। इन दिनों जितेन्द्र सिंह मुन्ना को जेल प्रशासन के जरिये जिला कारागार में शांति व्यवस्था बनाये रखने एवं उसके अपराध की गम्भीरता के मद्देनजर आजमगढ़ जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। जहां से उसे सम्बन्धित मुकदमों में पेशी के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच लाना पड़ता था। गैर जनपद से कड़ी व्यवस्थाओं के बीच आने के चलते उसे जल्दी-जल्दी पेशियों पर तलब करने में भी बाधा उत्पन्न होती थी। नतीजतन उसके खिलाफ चल रहे गम्भीर अपराधों का विचारण भी बाधित हो रहा है। शुक्रवार को हिस्ट्रीशीटर जितेन्द्र सिंह के खिलाफ एडीजे सप्तम की अदालत में चल रहे हत्या के मुकदमें में अर्जी देकर उसे सुलतानपुर जेल में शिफ्ट करने लिए मांग की गयी। सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार यादव ने हाईकोर्ट के निर्देश एवं मामले की परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए अग्रिम आदेश तक हिस्ट्रीशीटर को सुलतानपुर जिला कारागार में ही दाखिल करने का आदेश पारित किया है। अदालत के इस आदेश से जहां एक तरफ हिस्ट्रीशीटर को अपना नेटवर्क फैलाने के लिए राहत भरी खबर है, वहीं उसके खिलाफ चल रहे हत्या के मुकदमें में शीघ्र ही फैंसला आने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
इस मुकदमें में बना रिमांड
कुख्यात अपराधी जितेन्द्र सिंह मुन्ना को कुछ दिनों पहले कोतवाली नगर पुलिस ने गांजा बरामदगी मामले में जेल भेजने की कार्रवाई की थी। जिसे इस मामले में एडीजे प्रथम की अदालत से जमानत मिल गयी है। फिलहाल जामीनदारों के कागजातों में कमी के चलते उसकी रिहाई नहीं हो सकी है। जिसके मद्देनजर इस बार उसकी जमानत के लिए स्वयं उसकी पत्नी समेत दो जामिनदारों की तरफ से जमानतनामा दाखिल किया गया है,अदालत ने बेलबांड वेरिफिकेशन के लिए डीएम व एसपी के पास भेजा है। इस मामले में अभी रिहाई नहीं हो पायी थी कि इसी बीच पुलिस ने उसे जेल के सलाखों के पीछे ही बनाये रखने के लिए नया पैंतरा खेलते हुए गांजा बरामदगी के दौरान सीज हुई उसकी स्कार्पियो से जुड़े मामले में आजमगढ़ जेल से तलब कराकर एमवी एक्ट में सीजेएम कोर्ट से रिमाण्ड बनवा दिया। ऐसे में अब जमानतनामा सत्यापन हो जाने के बाद भी इस मामले में जमानत मंजूर न होने तक हिस्ट्रीशीटर की रिहाई अटकी रहेगी।