
प्रतापपुर. सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मदननगर में सोमवार को उस समय बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब पंचायत की बर्खास्त सरपंच सुंदरी बाई (Madannagar Sarpanch) के समर्थन में 20 निर्वाचित पंचों ने सामूहिक रूप से अपने पद से इस्तीफा दे दिया। ग्रामीण इसे आदिवासी नेतृत्व के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, जबकि प्रशासन पहले ही सरपंच को शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में पद से पृथक कर चुका है। पंचों द्वारा एसडीएम प्रतापपुर को सौंपे गए इस्तीफा पत्र में कहा गया है कि ग्राम पंचायत मदननगर की आदिवासी महिला सरपंच को असंवैधानिक और विधि-विरुद्ध तरीके से बर्खास्त किया गया है।
पंचों का आरोप है कि सरपंच सुंदरी बाई क्षेत्र के आदिवासी किसानों की आवाज उठा रही थीं तथा भूमि अधिग्रहण की प्रस्रि5या में पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के प्रावधानों का पालन नहीं किए जाने पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसी कारण उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई।
इस्तीफा देने वाले पंचों ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि सरपंच के खिलाफ की गई कार्रवाई से वे आहत हैं और विरोध स्वरूप स्वेच्छा से अपने पद से त्यागपत्र (Mass resignation) दे रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से उनके इस्तीफे स्वीकार करने की मांग की है।
मदननगर, कनकनगर और जगन्नाथपुर क्षेत्र में प्रस्तावित एसईसीएल भटगांव ओपन कास्ट कोयला परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण एवं डीजीपीएस सर्वे का कार्य किया जा रहा था। प्रशासन के अनुसार 2 और 3 अप्रैल 2026 को सर्वेक्षण के दौरान ग्रामीणों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें सरपंच सुंदरी बाई पर ग्रामीणों का नेतृत्व करने तथा शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने का आरोप लगाया गया।
प्रकरण की सुनवाई के बाद अनुविभागीय अधिकारी राजस्व प्रतापपुर ने उपलब्ध अभिलेखों, गवाहों के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर 8 जुलाई को आदेश पारित करते हुए सरपंच सुंदरी बाई को तत्काल प्रभाव से पद से पृथक कर दिया था।
सुनवाई के दौरान सरपंच सुंदरी बाई ने प्रशासन के आरोपों से इनकार किया था। उनका कहना था कि ग्रामसभा को सर्वेक्षण की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी और न ही उन्होंने ग्रामीणों को उकसाया। उन्होंने यह भी तर्क रखा था कि मदननगर पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां पेसा कानून लागू है और ग्रामसभा की सहमति एवं सहभागिता आवश्यक है। हालांकि प्रशासन ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया था।
मदननगर क्षेत्र में एसईसीएल की प्रस्तावित कोयला परियोजना (SECL coal project) को लेकर लंबे समय से ग्रामीणों और प्रशासन के बीच मतभेद की स्थिति बनी हुई है। प्रभावित ग्रामीण भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, मुआवजा तथा ग्रामसभा की भूमिका जैसे मुद्दों को लेकर लगातार अपनी बातें उठाते रहे हैं। अब पंचों के सामूहिक इस्तीफे के बाद यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
सामूहिक इस्तीफा (Mass resignation by panchs) देने वालों में सुनीता बेक, अमृता केसरी, हीरामती बेक, रामविनोद खाखा, धनसाय खेस, नन्की आयम, छोटेलाल कुजूर, अजय मिंज, कालीचरण, राधिका करसायल, फूलकुमारी साण्डिल्य, मानती खलखो, धरमजीत मिंज, दीपा टोप्पो, बिगन गिद्ध, करीमन, गीता गिद्ध, अमिला मिंज, करमु खलखो और बिसनी किस्पोट्टा शामिल हैं।