कलक्टर की पहल पर विकसित किया जाएगा इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रारंभिक स्तर पर खनिज विकास निधि से 1 करोड़ 13 लाख का आबंटन
सूरजपुर. केरल की सुप्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का सूरजपुर में अनुकरण किया जाएगा। केरल में प्रचलित पंचकर्म, योगा, फिजियोथेरेपी, होम्योपैथी समेत अन्य चिकित्सा सुविधाएं बहुत जल्दी ही सूरजपुर में भी लोगों को मिलेगी।
इसके लिए सूरजपुर कलक्टर केसी देवसेनापति ने कई सार्थक पहल की है और पुराने चिकित्सालय परिसर को जिला आयुर्वेद चिकित्सालय के रूप में विकसित करने 1.13 करोड़ का आबंटन जारी किया है। सूरजपुर में बनने वाला आयुर्वेद चिकित्सालय प्रदेश भर में अपनी अलग पहचान बनाएगा। यहां वे सारी सुविधाएं होंगी जो केरल के प्रसिद्ध संस्थानों में होती है।
गौरतलब है कि जिला गठन के बाद सूरजपुर को नये जिला चिकित्सालय की सौगात मिली और नया भवन बनकर तैयार भी हो गया है। जून माह में जिला चिकित्सालय नये भवन में संचालित होने के बाद वर्तमान जिला चिकित्सालय खाली हो जायेगा।
इस खाली परिसर की उपयोगिता बनाए रखने और जिलेवासियों को आयुर्वेद चिकित्सा के प्रति प्रेरित करने के उद्देश्य से इसे जिला आयुर्वेद चिकित्सालय बनाकर केरल की तर्ज पर पीडि़तों का आयुर्वेद पद्धति से इलाज करने हेतु विकसित किया जाएगा।
इसके लिए कलक्टर केसी देवसेनापति के निर्देशन में सीएचएमओ डॉ एसपी वैश्य एवं आयुर्वेद मेडिकल विशेषज्ञ डॉ. संध्या पाण्डेय ने विशेष कार्ययोजना तैयार की है और इस दिशा में पहल भी शुुरू कर दी है।
कलक्टर ने दिए 1.13 करोड़
केरल की तर्ज पर आयुर्वेद चिकित्सालय विकसित करने हेतु प्रारंभिक स्तर पर कलक्टर ने खनिज विकास निधि से आयुर्वेद विभाग को 1.13 करोड़ की राशि का प्रावधान किया है, जिससे जिला चिकित्सालय परिसर को आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए तैयार किया जायेगा।
चिकित्सालय परिसर की साज-सज्जा, वार्डों का नवीनीकरण, चिकित्सा उपकरण, औषधि, फर्नीचर, फर्शीकरण, पार्किंग, आधुनिक मशीन, लैब और पैरामेडिकल स्टाफ की प्रारंभिक व्यवस्था करने के उपरांत जिला मुख्यालय के समीप ही 5 एकड़ भूखण्ड में हर्बल पार्क बनाकर आयुर्वेदिक औषधि का उत्पादन का लक्ष्य भी रखा गया है।
केरल जाकर प्रशिक्षण प्राप्त करेगा चिकित्सा दल
जिले में आयुर्वेद चिकित्सा को प्रभावी ढंग से संचालित करने की दृष्टि से आयुर्वेद चिकित्सा दल को विभिन्न विधाओं में दक्षता हासिल करने के लिए केरल की उच्च स्तरीय संस्थानों में प्रशिक्षण हेतु भेजा जायेगा। ताकि सूरजपुर के आयुर्वेदिक चिकित्सालय में हर असाध्य बीमारियों का उपचार प्रभावी ढंग से हो सके।
घर पहुंच उपचार हेतु मोबाइल यूनिट
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ संध्या पाण्डेय ने बताया कि पंचकर्म जैसी चिकित्सा पद्धति से चिकित्सालय में तो उपचार होगा ही, लेकिन ऐसे मरीज जो नि:शक्त या शारीरिक कमजोरी के शिकार हैं। उनका इलाज घर में ही करने के उद्देश्य से मोबाइल यूनिट विकसित करने की योजना है, इसके लिए पीडि़त परिवार से शुल्क लिया जायेगा और प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ इसका संचालन करेंगे।
आयुर्वेद चिकित्सालय में लोगों के लिए होंगीं ये सुविधाएं
छत्तीसगढ़ में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति विलुप्त प्राय है, लेकिन जो आयुर्वेद को बेहतर ढंग से जानते हैं, वे इलाज के लिए केरल का रूख करते हैं। आयुर्वेद चिकित्सा क्षेत्र की सबसे प्रभावी एवं कारगर विधि पंचकर्म, योग , फिजियोथेरपी, आयुर्वेद औषधि, होम्योपैथी जैसी उत्कृष्ट चिकित्सा पद्धति सूरजपुर में विकसित होने के बाद लोग केरल जाना बंद कर देंगे। कलक्टर केसी देवसेनापति ने दन्तेवाड़ा में भी आयुर्वेद चिकित्सालय को बढ़ावा दिया था।
केरल से अध्ययन कर वापस लौटा चिकित्सा दल
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. संध्या पाण्डेय ने बताया कि कलक्टर के निर्देश पर आयुर्वेद चिकित्सकों का 6 सदस्यीय दल हाल ही में केरल से अध्ययन कर लौटा है।
केरल के कोट्टक्कल स्थित आर्य वैद्यशाला, त्रिशुर स्थित वैद्यरत्नम और कोथाट्टुकुलम स्थित श्रीधारियाम् सस्ंथान पहुंचकर अध्ययन दल के सदस्य डॉ. संध्या पाण्डेय, डॉ. रजनीश जायसवाल, डॉ. श्रीकृष्ण त्रिपाठी, डॉ. आशुुतोष सिंह एवं सिविल Engineer डॉ. निखिल यादव ने वहां संचालित चिकित्सा पद्धति, चिकित्सालय, उपकरण एवं उनका उपयोग, औषधि और उत्पादन विधि, चिकित्सालय का बाहरी और आंतरिक स्वरूप, मेडिकल वार्ड, संचालन के तौर तरीके के अलावा अन्य आवश्यक विषयों व इकाइयों का अध्ययन कर सूरजपुर में वैसी ही सुविधाएं विकसित करने की बातें कहीं।
प्रदेश में बनेगी पहचान
प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सालय तो है, लेकिन उच्च स्तरीय सुविधाओं वाला आयुर्वेद चिकित्सालय नहीं है। सूरजपुर में बनने वाला आयुर्वेद चिकित्सालय प्रदेश भर में अपनी अलग पहचान बनाएगा। यहां वे सारी सुविधाएं होंगी जो केरल के प्रसिद्ध संस्थानों में होती है।
जिला चिकित्सालय के रूप में मान्यता हासिल कर यहां आयुर्वेद मेडिकल विशेषज्ञ, आयुर्वेद सर्जन के अलावा 4 आयुर्वेद चिकित्सक अधिकारी व पैरामेडिकल स्टाफ के साथ ही होम्योपैथी चिकित्सकों की नियुक्ति व पद स्थापना की जायेगी। परिसर को आयुर्वेद चिकित्सालय हेतु अनुकूल संसाधनों से परिपूर्ण कर सुसज्जित किया जायेगा।
असाध्य रोगों का इलाज होगा संभव
चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति काफी कारगर और दूरगामी परिणाम देने वाली सर्वोतम चिकित्सा पद्धति है। लम्बे समय से जो लोग वात रोग, पक्षाघात रोग, श्वसनगत रोग, पाचन रोग, त्वचा आधारित रोग, मानसिक व्याधि, रक्तचाप, हृदयगत रोग, मधुमेह, लीवर, किडनी समेत अन्य रोगों से परेशान हैं। एक सीमा में रहकर आयुर्वेद पद्धति से इनका इलाज संभव है। सूरजपुर में शीघ्र ही यह सुविधा विकसित होगी।
डॉक्टरों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा केरल
आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को जिले में बढ़ावा देकर जनसामान्य को इलाज के लिए प्रेरित किया जाएगा। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति काफी कारगर और प्रभावी होती है। जिले में आयुर्वेद विधा की सम्पूर्ण चिकित्सा उपलब्ध कराने इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जायेगा और चिकित्सकों को केरल भेजकर प्रशिक्षित किया जायेगा।जिले में आयुर्वेद आधारित औषधि उत्पादन के लिए 5 एकड़ भूमि का चयन कर हर्बल पार्क विकसित करने की योजना है। फिलहाल इस उपचार पद्धति की बेहतर व्यवस्था के लिए 1.13 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
केसी देवसेनापति, कलक्टर सूरजपुर
असाध्य रोगों का है आयुर्वेद में इलाज
पक्षाघात, हृदय रोग, मनोरोग और अन्य असाध्य रोगों का आयुर्वेद पद्धति से उपचार काफी प्रभावी है। लोगों को इसके इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है, आयुर्वेदिक चिकित्सालय के लिए अधोसंरचना का विकास करने के उपरांत क्षेत्र में इसका प्रचार प्रसार किया जायेगा। लोगों को आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ केरल की तर्ज पर सूरजपुर में ही मिलेगा।
डॉ. एसपी वैश्य, सीएमएचओ सूरजपुर