लंबे समय फाइलों में अटका रहा, स्थाई समिति की बैठक में होगा फैसला
सूरत. मगदल्ला में समुद्र में गिरने से पहले तापी नदी पर कन्वेंशनल बैराज के प्रस्ताव को मंजूरी का इंतजार है। बैलून बैराज और कन्वेंशनल बैराज के बीच लंबे समय तक असमंजस में रहे मनपा प्रशासन ने प्रोजेक्ट को स्थाई समिति के एजेंडे पर लिया है।
हर साल बारिश का पानी समुद्र में बह जाता है और बाकी आठ महीने सिंगणपोर में बने कोजवे के आगे डाउन स्ट्रीम में नदी पथ सूखा रहता है। मगदल्ला के पास एक और कोजवे का निर्माण लंबे समय से मनपा के एजेंडे पर है। पहले यहां बैलून बैराज बनाए जाने की कवायद शुरू की गई थी। इसके लिए एसवीएनआइटी और गेरी ने नदी में ट्रायल रन भी किया था। मनपा प्रशासन को उनकी रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा और रिपोर्ट मिलने के बाद उस पर निर्णय में वक्त ज्यादा खिंचा।
बैलून बैराज के लिए रिपोर्ट निगेटिव मिलने के बाद मनपा प्रशासन ने यहां कन्वेंशनल बैराज मॉडल पर जाने का निर्णय किया और उसके लिए संभावनाएं तलाशने की कवायद शुरू हुई। प्रोजेक्ट पर असमंजस के कारण लंबे समय तक यह फाइलों में कैद रहा। पिछले कुछ दिनों से इस पर नए सिरे से कवायद शुरू हुई। मनपा ने तय किया कि यहां कन्वेंशनल बैराज ही बनाया जाएगा। सभी संभावनाएं तलाशने के बाद मनपा प्रशासन ने इसके प्रस्ताव को स्थाई समिति के एजेंडे पर लिया है। गुुरुवार को होने वाली समिति की बैठक में इस पर निर्णय किया जाएगा। इसके अलावा बैठक में पार्किंग पॉलिसी और अन्य प्रस्तावों पर भी चर्चा की जाएगी।
586 करोड़ खर्च होंगे
कन्वेंशनल बैराज पर 586.82 करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान लगाया गया है। इसमें 385.81 करोड़ रुपए कन्वेंशनल बैराज के कंस्ट्रक्शन पर खर्च होंगे। शेष 201.01 करोड़ रुपए की रकम बैराज के लिए अवाप्त की जाने वाली जमीन के मुआवजे के रूप में दी जानी है। बैराज के लिए जमीन संपादन भी मनपा के समक्ष बड़ी चुनौती है। मगदल्ला पर कोजवे बनने से जहां सिंगणपोर कोजवे की डाउन स्ट्रीम में नदी के आसपास भूजल स्तर बढ़ेगा, वहीं लोगों को खारे पानी की समस्या से भी निजात मिलेगी।
कोजवे पर और मोटी हुई पानी की चादर
कोजवे की रपट पर बह रहे पानी की चादर बुधवार को और मोटी हो गई। बुधवार को रपट पर ०.७३ मीटर की चादर चली। मंगलवार को कोजवे का जलस्तर ६.६८ मीटर था। बुधवार को ईद का अवकाश होने के कारण बड़ी संख्या में लोग पानी देखने कोजवे पर पहुंचे।