
सूरत. बुराई की प्रतीक होलिका का दहन गुरुवार को फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर शहर में जगह-जगह किया गया। सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना के साथ लोगों ने प्रदोषकाल में होलिका दहन किया। महिलाएं अपनी बहू-बेटियों के साथ होलिका की पूजा में सक्रिय रहीं। नई फसल की बालियां शगुन स्वरूप सेकी गईं। शुक्रवार को दिनभर रंगों की बौछार होगी और लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर रंगों के त्योहार की बधाई देंगे।
होलिका दहन से पहले गुरुवार सुबह से ही आयोजन स्थलों पर बच्चों और महिलाओं ने होलिका का विभिन्न सामग्री से शृंगार किया। महिलाएं अपनी बहू-बेटियों के साथ होलिका की पूजा में सक्रिय रहीं। महिलाओं ने गाय के गोबर से बनाए गए होलिका के गहने बडक़ूलों से भी होलिका का शृंगार किया। प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा के भद्रारहित काल में फाल्गुन पूर्णिमा गुरुवार शाम 7 बजकर 41 मिनट से होलिका दहन के आयोजन किए गए।
होलिका दहन के बाद महिलाओं ने छोटे बच्चों के साथ आयोजन स्थल की परिक्रमा लगाई और जल से अभिषेक किया। परवत पाटिया, गोडादरा, भटार समेत कई इलाकों में नई फसल की बालियां होलिका दहन की अग्नि में सेककर पूरा वर्ष धन-धान्य से भरपूर रहने की कामना व्यक्त की गई। होलिका दहन के बाद होली की रंगत जम गई। परवत पाटिया, गोडादरा, उधना, पांडेसरा, वेसू समेत जगह-जगह होली की धमाल होने लगी। देर रात तक उत्साही युवक समूह में चंग की थाप पर फाग गीत गाते हुए खूब नाचे। ऐसे आयोजनों का दौर जगह-जगह चला।
इको फ्रेंडली होलिका दहन
श्रीश्याम सेवा ट्रस्ट की ओर से वेसू के श्रीश्याम मंदिर प्रांगण में गुरुवार शाम को इको फ्रेंडली होलिका दहन किया गया। दहन में कंडे के अलावा पर्यावरण शुद्धि के लिए होलिका दहन में इलायची, लोंग, कपूर, हवन सामग्री आदि वस्तुओं का उपयोग किया गया। ट्रस्ट की ओर से होली स्नेह मिलन समारोह का आयोजन शुक्रवार शाम मंदिर प्रांगण में किया जाएगा।