- डीइओ कार्यालय के पास एफिडेविट और प्रपोजल जमा नहीं करने वाले स्कूलों के पते नहीं
सूरत.
सूरत जोन के सात जिलों की स्कूल फीस तय करने वाली फीस नियामक समिति (एफआरसी) के पास यह जानकारी नहीं है कि कितने स्कूलों ने एफिडेविट और फीस प्रपोजल नहीं दिए हैं। दूसरी ओर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पास ऐसे कई स्कूलों के नाम तो हैं, जिन्होंने प्रपोजल और एफिडेविट नहीं दिए, लेकिन उनका संपर्क नंबर और पता नहीं हैं। ऐसे स्कूलों को खोजने के लिए गुरुवार को शाला विकास संकुल समिति के साथ बैठक की गई।
निजी स्कूलों की फीस पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार ने एफआरसी का गठन किया है। दक्षिण गुजरात के सूरत, वलसाड, भरुच, नवसारी, तापी, नर्मदा और डांग जिलों की स्कूलों की फीस तय करने का जिम्मा सूरत जोन की एफआरसी को सौंपा गया है, लेकिन सूरत जोन की एफआरसी के पास आज भी यह जानकारी नहीं है कि दक्षिण गुजरात के जिलों में कितने स्कूल हैं। जिन स्कूलों ने एफिडेविट और प्रपोजल भेजे हैं, उनके संबंध में एफआरसी कार्य कर रही है। एफआरसी के पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं है कि जिले में कितने स्कूल हैं, कितनों ने एफिडेविट और प्रपोजल जमा किए हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट में होने का हवाला देकर एफआरसी आंकड़ों से बचने का प्रयास कर रही है। जिन स्कूलों ने एफिडेविट और प्रपोजल जमा नहीं किए थे, उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई तक का समय दिया था। 31 जुलाई को देर रात तक एफआरसी ने एफिडेविट और प्रपोजल का इंतजार किया। 31 जुलाई की रात तक एफआरसी को शैैक्षणिक सत्र 2017-18 के लिए 235 और 2018-19 के लिए 317 एफिडेविट मिले। शैक्षणिक सत्र 2017-18 के लिए 198 और 2018-19 के लिए 226 प्रपोजल मिले।
एफिडेविट और प्रपोजल नहीं दिए
गुरुवार को वनिता विश्राम में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से एक बैठक आयोजित हुई। इसमें शाला विकास संकुल समिति के अधिकारियों को बुलाया गया। कितने स्कूलों ने एफिडेविट और कितनों ने प्रपोजल जमा नहीं किए, बैठक में इस पर चर्चा की गई। जिला शिक्षा अधिकारी के पास ऐसे कई स्कूलों के नाम हैं, जिन्होंने एफिडेविट और प्रपोजल नहीं दिए हैं, लेकिन इनके पते और संपर्क नंबर नहीं है। शाला संकुल समिति के अधिकारियों को इन स्कूलों के नाम देकर इनके पते और संपर्क नंबर खोजने को कहा गया है।
बड़े स्कूलों के मामले में भी बेखबर
शहर के कई बड़े स्कूलों ने न एफआरसी और जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देशों का पालन किया, न सरकार के आदेश का। उन्होंने अपनी मर्जी के अनुसार फीस वसूली है। ऐसे स्कूलों ने प्रपोजल जमा किए या नहीं, इसकी भी एफआरसी को जानकारी नहीं है।