महा चक्रवात का खतरा टला नुकसान से चिंतित मछुआरे प्रशासन से मदद की उम्मीद कर रहे Danger of maha cyclone averted Fishermen worried of loss are expecting help from the administration
वापी. महा तूफान की घात भले टल गई, लेकिन मत्स्याटन के पूरे सीजन के दौरान मौसम में आए बदलाव ने मछुआरों को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया है। इस नुकसान से चिंतित मछुआरे प्रशासन से मदद की उम्मीद कर रहे हैं।
इस वर्ष मानसून खत्म होने के बाद भी बेमौसम बरसात ने खेतों में खड़ी और काट कर रखी फसलों को नुकसान पहुंचाया। दीपावली के दौरान बरसात और महा तूफान के प्रभाव ने मछुआरों की हालत पतली कर दी।
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चक्रवाती माहौल के कारण सभी मछलियां नष्ट हो गई
दीपावली का समय मछुआरों के लिए उत्तम रहता है। जिले के उमरगाम तहसील के मछुआरे इस दौरान समुद्र में जाकर मछली पकडऩे के लिए डीजल, बर्फ का स्टॉक जमा करते हैं। पूरी तैयारी के बाद दरिया में पहुंचकर मछली पकडक़र लाते हैं। बोम्बे डक कही जाने वाली बूमला प्रकार की मछली लाकर किनारे पर उसे सूखने के लिए लटकाया जाता है और उसके बाद बिक्री होती है। वहीं, इस बार चक्रवाती माहौल के कारण सभी मछलियां नष्ट हो गई। एकतरफ बरसात तो दूसरी तरफ धुम्मस एवं महा तूफान के कारण मछुआरों के साथ व्यापारी और बोट के खलासी भी बेहाल हैं। मछुआरों ने व्यापक नुकसान के लिए सरकार से मदद की उम्मीद जताई है। तहसील में करीब चार सौ से ज्यादा मछुआरे बोट लेकर दरिया में मत्स्याटन के लिए जाते रहते हैं। नारगोल के मनीष टंडेल के अनुसार छोटी बोट का रोजाना खर्च दस हजार और बड़ी बोट का रोजाना खर्च करीब 40 हजार रुपए आता है। इस वर्ष मौसम की मार ने मछुआरों से लेकर मछली व्यापारियों के लिए हालत दयनीय कर दी है। चार से पांच करोड़ रुपए का नुकसान आंका जा रहा है। बकौल मनीष टंडेल सरकार से सहायता मिलने पर ही क्षेत्र के छोटे छोटे मछुआरे फिर से खड़े हो सकते हैं, लेकिन अभी तक इस तरह की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि तूफान के कारण सभी बोट भी किनारे पर लगा दी गई है। मछली के व्यापारी मनोज टंडेल ने बताया कि मछलियां यहां से मुंबई जाती हैं। इस बार इस व्यापार को मौसम ने बड़ी चोट पहुंचाई है। बोट के खलासी व अन्य कर्मियों को वेतन देने में भी अब मुश्किल हो रही है।