
झींगा तालाब। फोटो- पत्रिका
South Gujarat Flood: दक्षिण गुजरात में आई विनाशकारी बाढ़ ने देश के प्रमुख झींगा उत्पादन क्षेत्र को भारी तबाही के मुहाने पर ला खड़ा किया है। नवसारी, वलसाड, दहाणु, भरूच और आसपास के तटीय इलाकों में अंबिका, मिंढोला, पूर्णा, पोर जैसी नदियों के उफान से लगभग 1,800 झींगा पालन तालाब जलमग्न हो गए, जिनमें से करीब 1,600 तालाबों की पाल पूरी तरह बह गई। कटाई के लिए तैयार 10 हजार टन से अधिक झींगा समुद्र में बह गया, जिससे प्रारंभिक अनुमान के अनुसार 800 करोड़ से अधिक का सीधा नुकसान हुआ है।
दक्षिण गुजरात में लगभग 6,000 झींगा तालाब हैं और यह गुजरात के झींगा निर्यात का प्रमुख केंद्र माना जाता है। किसानों ने बीज, चारा, बिजली और श्रम पर भारी निवेश किया था और कुछ ही दिनों में हार्वेस्टिंग शुरू होने वाली थी, लेकिन गत दिनों आसमान से बरसी बारिश रूपी आफत से 10 से 12 घंटे तक तालाबों की पाल से 3-4 फीट ऊपर बहते पानी ने पूरी फसल और ढांचे को तबाह कर दिया। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) की गवर्निंग बॉडी के सदस्य डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि 30 सालों की मेहनत से खड़ा हुआ उद्योग मात्र 30 घंटे की बाढ़ में खत्म हो गया।
68 सालों में ऐसी तबाही कभी नहीं देखी गई। वलसाड के झींगा उत्पादक एवं फीड सप्लायर मंथन नरेंद्र टंडेल के अनुसार, दहाणु से नवसारी तक करीब 95 प्रतिशत झींगा फार्म प्रभावित हुए हैं। उनकी सात साइटों पर ही 35-40 करोड़ का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि तैयार 25-30 तालाब के झींगे पूरी तरह बह गए और फीड सप्लाई का पूरा नेटवर्क भी ठप हो गया।
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि केवल किसानों की ही नहीं, बल्कि हैचरी, फीड, बर्फ, पैकिंग, परिवहन और प्रोसेसिंग इकाइयों से जुड़े 1.5 लाख से अधिक लोगों की आजीविका भी प्रभावित हुई है। तालाबों के पुनर्निर्माण, मिट्टी भराई और उपकरणों की मरम्मत पर करीब 300 करोड़ अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है।
यह केवल फसल का नुकसान नहीं, बल्कि 30 साल में खड़े हुए पूरे उद्योग पर बड़ा आघात है। सरकार को विशेष राहत पैकेज, आसान ऋण और पुनर्निर्माण सहायता तुरंत देनी चाहिए, अन्यथा हजारों किसान इस व्यवसाय से हमेशा के लिए बाहर हो जाएंगे।
Updated on:
27 Jul 2026, 3:01 PM IST
Published on:
27 Jul 2026, 2:56 PM IST
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