सूरत

इंडेप्थ स्टोरी : निजी स्कूलों में किताबों का खर्च पड़ता है भारी

सरकारी व एनसीईआरटी की किताबों से ज्यादा प्राइवेट पब्लिशर और पब्लिकेशन की किताबों पर जोर

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Apr 26, 2018

दिव्येश सोंदरवा.सूरत.
निजी स्कूल में सरकारी व एनसीईआरटी की किताबों से ज्यादा प्राइवेट पब्लिशर और पब्लिकेशन की किताबों पर जोर दिया जाता है। सबसे बड़ी विडम्बना तो यह भी है कि ये किताबें उन्हीं दुकानों या पब्लिशर के पास मिलती है, जो स्कूल तय करता है। गलती से आप किसी और प्रकाशन की वही किताब या मिलते-जुलते पाठ्यक्रम की अन्य किताब ले आए तो उसे अस्वीकार कर दिया जाता है। हर साल किताबों के खर्च में भी २५ प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो जाती है और इस कमाई का बड़ा हिस्सा संबंधित स्कूलों में बतौर कमीशन भी पहुंचाया जाता है। इसके अलावा स्कूल का बताया गया दुकानदार या पब्लिशर किताबों के लिए गए पूरे दामों का पक्का बिल भी देने से बचता है। बच्चों के भविष्य के आगे मजबूर अभिभावक जाने-अनजाने 'टैक्स चोरी के भागीदार भी बन जाते हैं।

इस तरह से उठाना पड़ता है किताबों का अतिरिक्त बोझ
कक्षा रुपए
कक्षा 1 से 8 3000 से 8000 रुपए
कक्षा 9 से 12 4500 से 10 हजार रुपए
(विज्ञान वर्ग की किताब का खर्च अलग से अधिक होता है)
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सरकारी और एनसीईआरटी किताब का खर्च
कक्षा रुपए
कक्षा 1 से 8 ५०० से 1500 रुपए
कक्षा 9 से 12 1500 से 5000 रुपए
(अभिभावकों के किताब के खर्च को बचाने के लिए गुजरात बोर्ड और एनसीईआरटी ने सभी कक्षाओं की सभी किताबें ऑनलाइन भी जारी कर रखी हैं। विद्यार्थी सारी किताबें नि:शुल्क भी ऑनलाइन से डाउनलोड करके प्रिन्ट ले सकते हैं।)
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स्कूल बस का किराया
२०१५-१६ : ८०० से १००० रुपए
२०१७-१८ : १२०० से १५०० रुपए
स्कूल ऑटो का किराया
२०१५-१६ : ४०० से ८०० रुपए
२०१७-१८ : ७०० से १२०० रुपए
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बड़े तो ठीक, नन्हों का खर्च भी कम नहीं
शहर में प्लेग्रुप की संख्या 200 से अधिक है इसे शुरू करने के लिए किसी भी तरह के प्रमाणपत्रों की आवश्यक्ता नहीं है। प्ले ग्रुप स्कूल चलाने वाले भी मनमानी फीस वसूलते हैं। इनकी फीस को लेकर भी कोई दिशा निर्देश नहीं हैं। हाल यह है कि जैसा बच्चा और अभिभावक मिला, उसके अनुसार मोलभाव कर लेते हैं।

शैक्षणिक सत्र फीस
2015-16 12 हजार से 18 हजार रुपए
2017-18 15 हजार से 25 हजार रुपए
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Published on:
26 Apr 2018 09:18 pm
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