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इंडेप्थ स्टोरी : बढ़ती फीस और सालभर के खर्चे अभिभावकों को पड़ रहे भारी

पढ़ाई का खर्च बना सुरसा का मुंह : अभिभावकों की जेब और कमाई पर भारी पड़ते शिक्षा के बोझ

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दिव्येश सोंदरवा.सूरत.

शहर के लाखों अभिभावकों को इन दिनों एक ही चिंता खाए जा रही है कि उनके बच्चों का एडमिशन जैसे-तैसे हो जाए। हजारों बच्चे नए स्कूलों में प्रवेश के लिए अपने मम्मी-पापा के साथ जद्दोजहद में लगे हैं तो लाखों वे भी हैं जिनके लिए अगली कक्षा में पदोन्नति बेहतर परिणाम लाने से ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अभिभावकों की सिरदर्दी दाखिले के लिए यकायक बढ़ा दी गई कई गुना फीस ने बढ़ा दी है। यह बढ़ोतरी कहीं २५ फीसदी तो कई जगह ४० फीसदी तक कर दी गई है। इसके अलावा ढेरों स्कूल ऐसे भी हैं जिन्होंने गत सत्र का बकाया इतना निकाल दिया है कि नए सत्र की महंगी फीस के साथ उसको चुका पाना अधिकांश अभिभावकों के लिए नामुमकिन हो गया है। नतीजतन स्कूलों और अभिभावकों के बीच इन दिनों सूरत में भारी घमासान मचा हुआ है। नए सत्र में बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया ने न केवल अभिभावकों की नींद उड़ा रखी है, बल्कि पल-पल वे उस सिस्टम को भी कोस रहे हैं जो मनमानी फीस पर लगाम लगाने की बातें तो बड़ी-बड़ी करता है, पर करता कुछ नहीं। अभिभावकों की जेब और कमाई पर भारी पड़ते शिक्षा के इसी बोझ के हर सच और पहलू को टटोला राजस्थान पत्रिका की टीम ने। पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि अच्छे स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने का सपना आम आदमी के बूते से बाहर हो रहा है। इसके अलावा आमदनी का सबसे बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई में खर्च हो रहा है।

सारे नियम बेमानी, बेलगाम बढ़ता है पढ़ाई का खर्च
निजी स्कूल प्रबंधनों की बढ़ती मनमानी को रोकने के लिए जितने भी नियम कायदे बने हैं, वे सब प्रवेश प्रक्रिया के दौरान दम तोड़ते नजर आते हैं। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से लेकर राज्य सरकार, गुजरात हाइकोर्ट तक सख्त हिदायत दे चुके हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में मुनाफाखोरी को हर हाल में रोका जाए। इसके बावजूद निजी स्कूलों में नए-नए तरीकों से अभिभावकों से वसूली का क्रम जारी है। प्रवेश प्रक्रिया के नाम पर पैसा लेना तो खर्चे का एक हिस्सा है। सालभर बच्चों से किसी न किसी मद में रुपए मंगवाने का क्रम जारी रहता है।

छह महीने की फीस जमा कराएं एकसाथ
शहर के निजी स्कूल सरकार के हर आदेश को ठेंगा दिखाते हैं। वे अभिभावकों से एकसाथ छह महीने की फीस जमा करने को कहते हैं। फीस जमा नहीं करने वाले अभिभावकों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी तक देकर डराया जाता है। शहर के सीबीएसई स्कूलों ने नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही फीस वसूलने का सिलसिला शुरू कर दिया है। इससे पहले ऐसे स्कूलों ने पुरानी फीस नहीं भरने वाले विद्यार्थियों के खिलाफ कार्रवाई तक कर विद्यार्थियों को निलंबित कर दिया, उनके परिणाम रोक दिए और आगे की कक्षा में प्रमोट तक नहीं किया। इधर, राज्य सरकार ने फीस विधेयक पारित कर स्कूलों को तीन माह की फीस ही एक साथ लेने को कहा है। पर, सरकार के इस आदेश को शहर के अधिकांश निजी स्कूल संचालक ताक पर रख रहे हैं। इधर, प्रोविजनल फीस और स्कूल फीस का मामला अब तक सुलझ नहीं पाया है।

एक साल का खर्च एक लाख रुपए तक
शहर के कई बड़े स्कूलों की फीस और अन्य खर्च को जोड़ें तो साल भर का आंकड़ा एक लाख रुपए से अधिक तक पहुंच जाता है। इतना खर्च करना आम आदमी के बूते के बाहर होता है। ऐसे में उनके बच्चों के बेहतरीन शिक्षण का सपना आंखों में ही दम तोड़ देता है। इधर, गुजरात बोर्ड और सीबीएसई बोर्ड स्कूल की फीस पर लगाम कसने के लिए कोई ठोस नियम अब तक नहीं है। स्कूल अपनी मर्जी के अनुसार प्रतिवर्ष ४० प्रतिशत तक फीस बढ़ा देते हैं, जबकि स्कूलों को 10 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने की छूट है। हालांकि इन दिनों फीस विधेयक को लेकर चले रहे विवाद के कारण कई स्कूलों ने फीस नहीं बढ़ाई है।

इन आंकड़ों से जानें सूरत जिले के स्कूलों का सूरत-ए-हाल
गुजरात बोर्ड माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों की संख्या (2017-18)
सरकारी 021
अनुदानित 199
स्वनिर्भर 616
कुल 836
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गुजरात बोर्ड माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूल स्कूल संख्या (2015-16)
सरकारी 015
अुनदातिन 204
स्वनिर्भर 521
कुल 740
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गुजरात बोर्ड के प्राथमिक स्कूलों की संख्या (2015-16)
सरकारी 300 से अधिक
अनुदानित 021
स्वनिर्भर 500 से अधिक
कुल 821 से अधिक
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गुजरात बोर्ड की प्राथमिक स्कूलों की संख्या (2017-18)
सरकारी 300 से अधिक
अनुदानित 021
स्वनिर्भर 700 से अधिक
कुल 1021 से अधिक
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जिले में सीबीएसई स्कूलों की संख्या
2015-16 35 से अधिक
2017-18 50 से अधिक
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फीस का ढांचा अनुदानित स्कूल
कक्षा 1 से 8 1000 से 1500
कक्षा 9 से 12 1500 से 2000 (विज्ञान वर्ग भी शामिल)
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फीस का ढांचा स्वनिर्भर स्कूल (2015-16)
कक्षा 1 से 8 10 हजार से 40 हजार तक
कक्षा 9 से 12 15 हजार से 55 हजार तक
(विज्ञान वर्ग भी शामिल)
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फीस का ढांचा स्वनिर्भर स्कूल (2017-18)
कक्षा 1 से 8 15 हजार से 45 हजार तक
कक्षा 9 से 12 20 हजार से 60 हजार तक
(विज्ञान वर्ग भी शामिल)
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स्वनिर्भर स्कूलों में सालाना पैसे मंगाने का तरीका
वार्षिक उत्सव 200 से 500 रुपए
फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता 300 से 1000 रुपए
खेल प्रतियोगिता 100 से 200 रुपए
विज्ञान मेला 500 से 1500 रुपए
स्पेशल डेज 100 से १०00 रुपए
इसके अलावा मदर्स-फादर्स डे, ग्रैंड पेरेंट्स डे, होली, नवरात्र, दीपावली, काइट-डे, फ्रेन्डशिप-डे, रक्षाबंधन जैसे कई अवसरों पर भी राशि मंगवाते हैं