सूरत शहर समेत दक्षिण गुजरात में हर रोज औसतन तीस जनों को आता आत्महत्या का विचार, बड़े रिश्तों और कर्ज से परेशान तो बच्चों को परीक्षा का डर, लोगों की जान बचाने के लिए जीवन आस्था ने जारी किया हैल्पलाइन नम्बर - 18602662345
दिनेश एम. त्रिवेदी
सूरत. देश के गोल्डन कॉरिडोर में स्थित सूरत शहर समेत दक्षिण गुजरात आर्थिक प्रगति के पथ पर भले ही कितना ही अग्रसर क्यों न हो, यहां प्रतिदिन औसतन तीस लोगों का जिंदगी से मोहभंग हो रहा है। इन लोगों को अपनी जिंदगी खत्म करने का विचार आता है। यह मानना है आत्महत्या को रोकने के लिए शुरू की गई जीवन आस्था हेल्पलाइन का।
सूरत में 2013 में शुरु की गई इस हेल्पलाइन पर अब तक १३ हजार से भी अधिक लोगों के फोन कॉल आ चुके है। जो अपनी विभिन्न परेशानियों के चलते जिंदगी से पूरी तरह से हताश हो चुके थे और अंतिम विकल्प के रूप में अपने जीवन को ही खत्म करने का विचार कर रहे थे।
हेल्पलाइन द्वारा उनकी समस्याओं को समझ कर हर संभव मदद देने का प्रयास किया जाता है। समस्या खत्म होने पर कई लोग इरादा बदल देते है लेकिन जिन लोगों की परेशानी खत्म नहीं होती। वे आखिरकार इस दुनिया को अलविदा कह देते है।
रिश्ते , कर्ज और परीक्षा
हेल्पलाइन की सुपरवाइजर योगिता भरुची ने बताया कि प्रतिदिन औसतन 30 कॉल आते है। इनमें से तकरीबन 80 फीसदी लोग अपने निजी व पारिवारिक रिश्तों में खटास की वजह से परेशान होते है। वहीं 10-15 फीसदी कर्ज के चलते लेनदारों से परेशान होते है। वहीं पांच दस फीसदी परिक्षा, नौकरी, बीमारी समेत अन्य कारणों की वजह से आत्महत्या करना चाहते है। बोर्ड परिक्षाओं के दौरान परिक्षार्थियों के कॉल अधिक आते हैं, लेकिन परिणाम आने के साथ ही इनकी संख्या बहुत कम हो जाती है।
573 लोगों को बचाया
भरुची ने बताया कि हमारे काउन्सलर कॉल करने वाले की समस्या विस्तार से सूनते है और फिर उसके हिसाब से काउन्सलिंग शुरु की जाती है। जरुरत पडऩे पर विषय के विशेषज्ञों के जरिए कानूनी व मनोचिकित्सकों की भी काउन्सलिंग के लिए मदद ली जाती है। इस तरह से अब तक कुल 573 लोगों को बचाया गया है जो हताशा के अंतिम पायदान पर थे। यदि उन्हें समय पर मदद और मार्गदर्शन नहीं मिलता तो वे अपना जीवन खत्म कर देते। कई लोग ऐसे भी होते हैं जो एक-दो बार कॉल करने के बाद संपर्क तोड़ देते हैं। बाद में आत्महत्या भी कर लेते हैं।