
सूरत।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भले गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी का चेहरा बनकर माहौल बदलने में जुटे हैं। लेकिन संगठन की हर बैठक में ‘बूथ प्रमुखों’ को स्टार की तरह तवज्जो मिल रही है। पार्टी उनका मनोबल बढ़ाकर उनके भरोसे चुनाव की नैया पार लगाने में जुटी है, क्योंकि जनता के पास पहुंचने का काम बूथ प्रमुख (पेज प्रमुख भी) ही कर रहे हैं। मतदान का प्रतिशत ऊंचा करने का जिम्मा इनके कंधों पर ही है।
चुनाव में इस बार भाजपा के लिए कई पहलू चिंता का कारण बने, लेकिन उन पर जोर देने से ज्यादा संगठन ने अपनी सबसे छोटी इकाई का मनोबल बढ़ाने का काम किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की बैठक हो या राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री बी.सतीश का मंथन, हर जगह पेज प्रमुखों को महत्व दिया गया। इस गूढ़ कार्य में संगठन के कई पदाधिकारियों तक को दरकिनार कर पेज प्रमुखों की पूछ-परख की गई। शीर्ष नेतृत्व ने पदाधिकारियों की भूमिका को सिर्फ सूचनावाहक के तौर पर रखा। पेज प्रमुखों पर भरोसा जताने के बाद जब वे सतही काम पर उतरे तो पार्टी और संगठन के वरिष्ठ नेताओं की जान में जान आई मामले को ठंडा करने में भी सफल हो रहे हैं।
बूथों की भी कैटेगरी
भाजपा ने अपने वोटरों का आकलन कर पहले से बूथों का वर्गीकरण ए,बी,सी और डी के रूप में चिह्नित कर दिया है। इसमें ए-कैटेगरी में वे बूथ हैं, जहां पिछले चुनाव में बेहतर प्रदर्शन था। यहां सौ मत अधिक लाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं बी-कैटेगरी में बराबरी वाले बूथ हैं, जहां आगे बढऩे पर काम होगा। सी और डी कैटेगरी में माइनस वाले बूथ हैं, यहां अपने पक्ष में वोटिंग बढ़ाने के लिए कार्यकर्ताओं को कई तरह की नसीहतें दी जाती हैं।
इस तरह से काम कर रही पेज प्रमुख सेना
बूथ पदाधिकारियों को यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई है कि वह हर बूथ की मतदाता सूचियों के पन्नों को उनके प्रमुखों तक पहुंचाए। यह पेज प्रमुख फिर वोटर लिस्ट का एक पन्ना लेकर प्रत्यक्ष रूप से वोटरों से मिले भी। यानी एक-एक वोटर से मिलने की जिम्मेदारी पेज प्रमुखों को सौंपी गई है। आमतौर पर एक पेज पर 50 लोगों के नाम होते हैं। आमतौर पर पेज प्रमुख को उसी पेज की जिम्मेदारी दी जाती है, जिस पेज पर उसका खुद का नाम भी होता है। इस वजह से वह आसानी से सभी नामों को पहचानता है और घर-घर जाकर भाजपा का पर्चा और वोट देने की अपील करने में सक्षम हो पाता है।
जहां पन्ना प्रमुख नहीं वहां लोग नाराज
कार्यकर्ताओं को जमीन पर मजबूत होने का संदेश दिया जा रहा हैं। जमीनी असलियत को महत्व दिया जा रहा है। जिन क्षेत्रों या सोसायटियों मेें पन्ना प्रमुख नहीं बने हैं, वहां शहर, वार्ड और बूथ पदाधिकारियों को खरी-खरी सुनने को भी मिल रहा है।
मेरे धर्म का सर्टीफिकेट देने की जरूरत नहीं : राहुल
सोमनाथ मंदिर में दर्शन के बाद उठे विवाद पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अमरेली में हुई एक बैठक में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मेरी दादी और मेरा परिवार शिवभक्त है। मेरे धर्म को लेकर मुझे किसी को भी सर्टीफिकेट देने की जरूरत नहीं है। धर्म का सर्टीफिकेट देकर मैं दलाली नहीं करना चाहता। सरदार पटेल और जवाहर नेहरू अच्छे दोस्त थे। राहुल गांधी ने सोमनाथ मंदिर में पहुंचकर माथा टेका और जलाभिषेक किया। उन्होंने मंदिर की परिक्रमा की थी और सरदार पटेल की प्रतिमा पर फूल भी चढ़ाए थे।
बिनोद पाण्डेय