
सूरत. शहर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए जिस क्षेत्र को चिन्हित किया था, उसके हाल बदहाल हैं। जो स्थितियां हैं, बताती हैं कि सरकारी विभाग ही स्मार्ट सिटी की स्मार्टनेस को बरबाद करने पर आमादा हैं। डुंभाल प्रोजेक्ट के परवत पाटिया क्षेत्र से निकलती रुपाली नहर की कहानी तो यही कहती दिखती है। पानी बंद होने के बाद नहर में कचरा जमा हो जाता है, जो वहां रह रहे लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता है।
देशभर में पहले चरण में स्मार्ट हो रहे शहरों में सूरत भी शामिल है। शहर की स्मार्टनेस को बढ़ाने के लिए मनपा प्रशासन ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर दो तरह से आगे बढऩे का निर्णय किया था। एरिया बेस डवलपमेंट के तहत लिंबायत और वराछा जोन की सात टीपी को मिलाकर पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया, जिसे डुंभाल प्रोजेक्ट का नाम दिया था। परवत पाटिया का क्षेत्र भी डुंभाल प्रोजेक्ट का हिस्सा है। शहर के बीच से गुजर रही रुपाली नहर यहां से भी होकर बहती है।
मनपा प्रशासन ने बीआरटीएस प्रोजेक्ट के तहत कैनाल कॉरिडोर बनाकर नहर की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए थे। यही नहर आए दिन इस क्षेत्र में रह रहे लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती रहती है। नहर विभाग रोटेशन के आधार पर नहर में पानी छोड़ता है। आमतौर पर सप्ताह में तीन दिन नहर में पानी आता है तो तीन दिन नहर बंद रखी जाती है। जब भी नहर में पानी छोडऩा बंद किया जाता है, जमानेभर की गंदगी नहर के विभिन्न जंक्शनों पर जमा हो जाती है। रुपाली नहर के पाटिया जंक्शन पर भी पानी बंद होने पर कचरे का ढेर बदबू मारने लगता है। जब नहर में पानी आता है तो यही कचरा पानी पर तैरता मिलता है।
नहरबंदी के दौरान जमा हुए कचरे से फैल रही बदबू आसपास के क्षेत्र में रह रहे लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती है। इसके अलावा कैनाल कॉरिडोर पर सुबह की सैर के लिए निकलने वाले लोगों को भी ताजी हवा में सांस लेना दूभर हो जाता है। साथ ही कचरे के कारण मच्छरों का उत्पात भी बढ़ जाता है, जो संक्रामक रोगो की वजह बनता है। लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद नहर विभाग उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दे रहा। बीते कई वर्षों से इस क्षेत्र में नहर की सफाई नहीं हुई है, जिससे समस्या रोज बढ़ रही है।
नहीं देते ध्यान
जब भी नहर में पानी बंद हो जाता है, जंक्शन पर कचरा का ढेर लग जाता है। बार-बार शिकायत के बाद भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।
शिवजी साहू, स्थानीय निवासी