सूरत

जब घरों में कैद हो जाती है पॉश इलाकों की आबादी

डूमस रोड पर मैराथन समेत विभिन्न आयोजनों के दौरान रास्ते बंद रहने से होती है परेशानी

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Apr 04, 2018

दिनेश एम.त्रिवेदी
सूरत.

आम दिनों की तरह दोपहर बाद लोग डूमस रोड के विभिन्न मॉल में पहुंचते हैं- कुछ खरीदारी के लिए, कुछ तफरीह के लिए तो कुछ मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखने। कुछ घंटे बाद जब उनकी भीड़ मॉल्स से बाहर आती है तो बदला हुआ नजारा देखकर हैरान-परेशान होती है। पता चलता है कि आज मैराथन है, इसलिए डूमस रोड को आम यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। पार्किंग से अपने वाहन निकालकर कई लोगों को लौटने के लिए कई गलियों को नापना पड़ता है तो उन लोगों को लम्बा सिरदर्द झेलना पड़ता है, जो आने-जाने के लिए सिटी बसों या ऑटो रिक्शों पर निर्भर रहते हैं, क्योंकि उस समय वहां न तो सिटी बस है, न ही कोई ऑटो... यह नजारा पिछली 24 मार्च का है, जब सूरत में हुई नाइट मैराथन को लेकर समूचे डूमस रोड पर आम यातायात पर रोक लगा दी गई थी। इससे महीनेभर पहले 25 फरवरी को भी नाइट मैराथन हुई थी और 18-19 मार्च को मनपा ने दौड़ तथा साइकिल दौड़ का आयोजन किया था। इन आयोजनों के दौरान भी डूमस रोड पर आम यातायात पर रोक लगा दिए जाने से काफी बड़ी आबादी को परेशानियों से जूझना पड़ा था।

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पिछले कुछ साल से शहर में मैराथन समेत समय-समय पर होने वाले सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर पुलिस पॉश इलाकों की बड़ी आबादी को घरों में कैद कर देती है। इससे लोगों को तरह-तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। आपात हालत में मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। उत्सव प्रिय सूरतीयों के लिए डूमस रोड के पॉश इलाके पीपलोद, वेसू, मगदल्ला आकर्षण का केन्द्र हैं। इन इलाकों में चौड़ी सड़कों के साथ बहुमंजिला इमारतें, बड़े मॉल्स, शोरूम, सिनेमाघर, स्कूल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, क्रिकेट स्टेडियम आदि हैं। लग्जरी अपार्टमेंट्स, बंगले, पार्टी प्लॉट्स, फॉर्म हाउस भी हैं। थर्टी फस्र्ट नाइट, गणपति विसर्जन, मैराथन, यू-टर्न, रावण दहन, समेत कई कार्यक्रमों का आयोजन इसी क्षेत्र में किया जाता है। एयरपोर्ट इसी क्षेत्र में होने के कारण बड़े नेताओं, सेलेब्रिटीज आदि के सूरत आगमन पर स्वागत कार्यक्रम, रैलियां भी समय-समय पर होते रहते हंै। इन आयोजनों के दौरान पुलिस बैरिकेट लगाकर रास्ते बंद कर देती है। इन इलाकों में आने-जाने के मुख्य मार्ग आम वाहनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं। कई बार यह कुछ घंटों के लिए होता है तो कई बार पूरे दिन रास्ते बंद रहते हैं। इससे इलाके के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। हालांकि वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की जाती है, लेकिन इन मार्गों पर यातायात का दबाव इतना बढ़ जाता है कि वहां से निकलना मुश्किल हो जाता है।

होती है तकरार
इन आयोजनों के वक्त संचार माध्यमों से लोगों को पुलिस के विशेष इंतजाम की जानकारी मिल जाती है, लेकिन कई बार इस बारे में पता नहीं चल पाता। लोगों को तभी पता चलता है, जब वह या तो घर से निकल रहे होते हैं या घर लौट रहे होते हैं। ऐसे में जब उन्हें रोका जाता है तो पुलिसकर्मियों के साथ उनकी कहासुनी हो जाती है।

जख्मी हो गया वृद्ध
पिछली मैराथन के दौरान यातायात बंद होने से वेसू हेप्पी होम रेजिडेंसी निवासी नेमिचंद जैन (70) जख्मी हो गया। उसे मैराथन के बारे में जानकारी नहीं थी। रात करीब आठ बजे लौटते समय मुख्य मार्ग पर बैरिकेटिंग कर बैठी पुलिस ने उसे रोका। बिना वाहन घर तक पहुंचना उसके लिए मुश्किल था। और कोई विकल्प नहीं होने के कारण उसने बैरिकेटिंग पार करने की कोशिश की और गिरने से जख्मी हो गया। कुछ लोगों और पुलिसकर्मियों ने उसे निकट के अस्पताल पहुंचाया।

फैक्ट फाइल
५ लाख से अधिक लोग रास्ते बंद होने से होते हैं प्रभावित
५० किलोमीटर से अधिक लंबा रास्ता होता है बाधित
५० अधिक बड़े आयोजन होते है सालभर में


नजरबंद हो जाते हैं
हमारा घर वेसू में है। मैराथन जैसे बड़े आयोजन पर हम कई घंटों के लिए अपने घरों में कैद हो जाते हैं। कहीं भी आना-जाना मुश्किल हो जाता है। इमरजेंसी में हालात और खराब हो जाते हैं।
मेघराज कादमावाला, व्यापारी

चक्कर पे चक्कर
क्षेत्र में बड़े आयोजन होने से वाहन से घर तक पहुंचना और निकलना मुश्किल हो जाता है। रास्ते बंद होने के कारण वाहन किसी परिचित के यहां रख कर पैदल घर पहुंचना पड़ता है। रास्ता खुलने पर वाहन लेने जाना पड़ता है।
अमित जैन, व्यापारी

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Published on:
04 Apr 2018 01:12 pm
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