सूरत

ग्राउंड रिपोर्ट: सालों की मेहनत, 30 घंटे में तबाह, बाढ़ ने बहा दिया दक्षिण गुजरात का झींगा साम्राज्य

Gujarat Shrimp Farming: दक्षिण गुजरात में आई भीषण बाढ़ ने झींगा पालन उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाया है। करीब 1,800 तालाब प्रभावित होने से 800 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है और 1.5 लाख लोगों की आजीविका पर संकट गहरा गया है।
2 min read
Jul 27, 2026
Gujarat Shrimp Farming
झींगा तालाब। फोटो- पत्रिका

South Gujarat Flood: दक्षिण गुजरात में आई विनाशकारी बाढ़ ने देश के प्रमुख झींगा उत्पादन क्षेत्र को भारी तबाही के मुहाने पर ला खड़ा किया है। नवसारी, वलसाड, दहाणु, भरूच और आसपास के तटीय इलाकों में अंबिका, मिंढोला, पूर्णा, पोर जैसी नदियों के उफान से लगभग 1,800 झींगा पालन तालाब जलमग्न हो गए, जिनमें से करीब 1,600 तालाबों की पाल पूरी तरह बह गई। कटाई के लिए तैयार 10 हजार टन से अधिक झींगा समुद्र में बह गया, जिससे प्रारंभिक अनुमान के अनुसार 800 करोड़ से अधिक का सीधा नुकसान हुआ है।

झींगा निर्यात का प्रमुख केंद्र

दक्षिण गुजरात में लगभग 6,000 झींगा तालाब हैं और यह गुजरात के झींगा निर्यात का प्रमुख केंद्र माना जाता है। किसानों ने बीज, चारा, बिजली और श्रम पर भारी निवेश किया था और कुछ ही दिनों में हार्वेस्टिंग शुरू होने वाली थी, लेकिन गत दिनों आसमान से बरसी बारिश रूपी आफत से 10 से 12 घंटे तक तालाबों की पाल से 3-4 फीट ऊपर बहते पानी ने पूरी फसल और ढांचे को तबाह कर दिया। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) की गवर्निंग बॉडी के सदस्य डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि 30 सालों की मेहनत से खड़ा हुआ उद्योग मात्र 30 घंटे की बाढ़ में खत्म हो गया।

95 प्रतिशत झींगा फार्म प्रभावित

68 सालों में ऐसी तबाही कभी नहीं देखी गई। वलसाड के झींगा उत्पादक एवं फीड सप्लायर मंथन नरेंद्र टंडेल के अनुसार, दहाणु से नवसारी तक करीब 95 प्रतिशत झींगा फार्म प्रभावित हुए हैं। उनकी सात साइटों पर ही 35-40 करोड़ का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि तैयार 25-30 तालाब के झींगे पूरी तरह बह गए और फीड सप्लाई का पूरा नेटवर्क भी ठप हो गया।

फिर से निर्माण पर बड़ा खर्च

उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि केवल किसानों की ही नहीं, बल्कि हैचरी, फीड, बर्फ, पैकिंग, परिवहन और प्रोसेसिंग इकाइयों से जुड़े 1.5 लाख से अधिक लोगों की आजीविका भी प्रभावित हुई है। तालाबों के पुनर्निर्माण, मिट्टी भराई और उपकरणों की मरम्मत पर करीब 300 करोड़ अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है।

प्रमुख नुकसान एक नजर में

  • 1,800 झींगा तालाब प्रभावित, 1600 की पाल बह गई।
  • 10,000 टन से अधिक तैयार झींगा फसल नष्ट।
  • 800 करोड़ से अधिक का सीधा नुकसान।
  • 300 करोड़ पुनर्निर्माण पर संभावित खर्च।
  • 1.5 लाख लोगों की आजीविका प्रभावित।
  • 95% झींगा फार्म बाढ़ की चपेट में।

यह केवल फसल का नुकसान नहीं, बल्कि 30 साल में खड़े हुए पूरे उद्योग पर बड़ा आघात है। सरकार को विशेष राहत पैकेज, आसान ऋण और पुनर्निर्माण सहायता तुरंत देनी चाहिए, अन्यथा हजारों किसान इस व्यवसाय से हमेशा के लिए बाहर हो जाएंगे।

  • डॉ. मनोज शर्मा, सदस्य, गवर्निंग बॉडी, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड
Updated on:
27 Jul 2026 03:01 pm
Published on:
27 Jul 2026 02:56 pm