एक अक्टूबर से कंटेनर फ्री होगा सूरत, आयुक्त ने दी हिदायत, बनाओ रोडमैप
सूरत. मनपा आयुक्त एम थेन्नारसन ने स्वास्थ्य विभाग को शहर को कंटेनर फ्री बनाने का रोडमैप तैयार करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि एक अक्टूबर से शहर को पूरी तरह कंटेनर फ्री बनाना है। उपाय खोजिए यह कैसे संभव होगा?
महापौर जगदीश पटेल ने पिछले दिनों मनपा आयुक्त और अन्य अधिकारियों के साथ संकलन बैठक में शहर को कंटेनर फ्री बनाने की हिदायत दी थी। उन्होंने कहा था कि शहर में कोई प्वाइंट नहीं बचना चाहिए, जहां डोर टु डोर गार्बेज कलेक्शन नहीं किया जाए। साथ ही शहर को पूरी तरह कंटेनर फ्री बनाया जाए। पटेल ने कहा था कि एक बार नीति पर अमल के बाद गार्बेज कलेक्शन के लिए शहर में जगह-जगह रखे गए कंटेनरों को हटा दिया जाए। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए मनपा आयुक्त ने स्वास्थ्य विभाग को इस दिशा में काम करने के लिए कहा है।
मनपा की बुधवार को हुई विभागीय समीक्षा बैठक में आयुक्त ने साफ कर दिया कि शहर में एक अक्टूबर से कहीं कोई कंटेनर नहीं दिखना चाहिए। सूरत को तय तिथि से पूरी तरह कंटेनर मुक्त कर दिया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को गाइडलाइन तैयार करनी होगी जिसपर अमल कर शहर में लगे कंटेनरों को हटाया जाए। उन्होंने कहा कि एक माह के भीतर रोडमैप तैयार कर लिया जाए, जिससे एक अक्टूबर के बाद कचरा डालने के लिए लोगों को कचरा पेटियों की जरूरत ही न पड़े।
बैठक में आयुक्त ने शहरभर में चल रहे अतिक्रमण और अवैध निर्माण को ढहाने के अभियान की समीक्षा की। उन्होंने अब तक की प्रगति पर संतोष जताते हुए कहा कि पार्किंग और मार्जिन की जगह खाली कराने के लिए अभियान को जारी रखा जाए। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सूरत समेत प्रदेशभर में इन दिनों पार्किंग और मार्जिन की जगह पर हुए अवैध निर्माण को ढहाने के साथ ही रास्तों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
आउटर रिंगरोड पर हुई चर्चा
सूडा अधिकारियों और सिटी इंजीनियर के बीच हुई बैठक में आउटर रिंगरोड को लेकर चर्चा की गई। सिटी इंजीनियर भरत दलाल के दफ्तर में हुई बैठक में विमर्श हुआ कि किस तरह आउटर रिंगरोड के अटके काम को आगे बढ़ाया जाए। गौरतलब है कि आउटर रिंगरोड के लिए चार टेंडर निकाले गए थे, जिसमें तीन कामों के लिए रिटेंडरिंग की जानी है। सूडा और मनपा प्रशासन मिलकर शहर में आउटर रिंगरोड का निर्माण करा रहे हैं। आउटर रिंगरोड प्रोजेक्ट की विशेषता यह है कि इसके लिए फंडिंग खुद प्रोजेक्ट से ही की जाएगी। इसी खासियत की वजह से प्रोजेक्ट को केंद्र की यूपीए सरकार ने भी सराहा था।