
सूरत। ‘हम तुम्हारे बॉस हैं और तुम हमारे नौकर… हमने बुलाया तो तुरंत आना ही पड़ेगा।’ यह आदेश सूरत के नई सिविल अस्पताल स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे भावी चिकित्सकों को उनके ही सीनियर्स देते थे। रेजिडेंट डॉक्टर मामले को राज्य सरकार ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया के कड़े निर्देशों के बाद गठित विशेष जांच कमेटी ने महज 24 घंटे के भीतर पूरी जांच प्रक्रिया निपटा दी।
एंटी रैगिंग स्क्वॉड और उच्चस्तरीय कमेटी की करीब 8 से 9 घंटे चली मैराथन जांच के बाद बड़ा एक्शन लिया गया है। रैगिंग और गंभीर अनुशासनहीनता के आरोप में 4 सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. निराली वसावे, डॉ. अनुज महेश्वरी, डॉ. दीक्षिता घेवरिया और डॉ. हिना भूत को 6 महीने के लिए सस्पेंड कर तत्काल हॉस्टल खाली करने का फरमान सुनाया गया है। वहीं माइक्रोबायोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष (एचओडी) डॉ. सुमैया मुल्ला सहित फैकल्टी सदस्य डॉ. संगीता राजदे, डॉ. योगिता मिस्त्री और डॉ. लतिका पुरोहित को कारण बताओ नोटिस (शो-कॉज) जारी किया गया है। वहीं गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जूनियरों का अपमान करना या उन्हें टॉर्चर करना हमारी संस्कृति नहीं है।
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पीड़ित जूनियर डॉक्टर अपनी सीनियर फैकल्टी के पास गुहार लगाने गए थे, लेकिन प्रोफेसरों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। मेडिकल कॉलेज डीन ऑफिस की ओर से अब इस मामले में पुलिस प्राथमिकी (एफआइआर) दर्ज कराई जाएगी। डीन कार्यालय के अनुसार पुलिस में केस दर्ज होने पर आरोपियों पर 'टर्मिनेशन इफेक्ट' भी लागू किया जाएगा। कॉलेज काउंसिल ने सर्वसम्मति से इस रिपोर्ट पर मुहर लगाकर रिपोर्ट गांधीनगर एडिशनल डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन (एडीएमई) जयेश सचदे और राज्य सरकार को सौंप दी है।
जूनियरों ने लिखित आवेदन दिया है। रैगिंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। विभागाध्यक्ष के नीचे दो-तीन फैकल्टी काम नहीं करतीं और दादागिरी करती हैं, उन पर भी जवाबदेही तय होगी।