सूरत

बरसाती पानी के संचय के लिए पूरी सोसायटी को किया जागरूक

25 साल पहले दर्शन देसाई ने घर में ही बरसात के पानी का संचय करना शुरू किया था, महज 15 हजार के खर्च से पानी संचय करने की बनाई गई प्रणाली

2 min read
May 14, 2018

सूरत.

पानी जीवन की पहली जरूरत है। पानी को बचाने के लिए जागरुकता के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकारें भी पानी बचाने का संदेश देती रहती है। इसके बावजूद लोग पानी बचाने के संदेश को गंभीरता से नहीं ले रहे हंै। बारिश के पानी का संचय सही से नहीं हो रहा है। सूरत के पर्यावरण प्रेमी दर्शन देसाई ने 25 साल पहले ही बारिश के पानी का संग्रह करना शुरू कर दिया था। साथ ही अपनी पूरी सोसायटी को भी पानी संग्रह करने के लिए जागरूक किया।
भटार स्थित परिमल संकुल निवासी दर्शन देसाई शहर में प्रयास नामक संस्था चलाते हैं। यह संस्थान प्राणी और पक्षिओं के लिए कार्य करती है। पशु-पक्षियों को बचाने वाले दर्शन पानी को भी बचाने का प्रयास कर रहे हैं। आज से 25 साल पहले दर्शन ने अपने घर में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किया। इसको लगाने में दर्शन को 15 हजार का खर्च आया। इस प्रणाली से बारिश का पानी घर में जमा होता है। इसी पानी को पूरे साल तक घर के उपयोग में लाया जाता है। इसके लिए इसमें दो फिल्टर लगाए गए हैं। इनकी सहायता से पानी साफ होकर घर के उपयोग में लिया जाता है।

ये भी पढ़ें

Admission 2018 : कम परिणाम से खाली रह सकती हैं सीटें

सभी के लिए बने प्रेरणास्रोत
दर्शन मात्र खुद ही बारिश के पानी का संचय नहीं करते है बल्कि उन्होंने अपनी सोसायटी के लोगो को भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए जागरूक किया। दर्शन की सोसायटी के ज्यादातर लोगों ने इस प्रणाली को अपने घर में लगाया है। आज सभी इस प्रणाली की सहायता से बारिश का पानी जमा करते हैं और उसे वापस पुन: उपयोग में ले रहे हैं। दर्शन पानी बचाने के लिए प्रेरणा बने हंै।

भूगर्भ का पानी होता है मीठा
दर्शन का कहना है कि बारिश के पानी को दो तरह से संचय किया जाता है। वाटर टैंक में और एक सीधा भूगर्भ में भी इसे भेजा जा सकता है। वाटर टैंक का पानी फिल्टर की सहायता से साफ कर उपयोग में लिया जाता है। भूगर्भ में भेजा पानी जमीन के जलस्त्रोत को बढ़ाता है। बोरिंग का पानी आज खारा हो रहा है। इस प्रणाली से जमीन में मीठा पानी जमा किया जा सकता है।

जनजीवन के लिए उपयोगी
यह प्रणाली लगाने के बाद अन्य कई लोगों को जागरूक किया है, जिससे इसे लगाने वालों की संख्या बढ़ी है। आज भी यह प्रणाली काम आ रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि जल ही जीवन है। यह सभी के लिए उपयोगी साबित हो रही है।
दर्शन देसाई, प्रयास संस्था

ये भी पढ़ें

गुजरात बोर्ड परिणाम 2018 : द. गुजरात में सूरत जिला सबसे आगे
Published on:
14 May 2018 09:38 pm
Also Read
View All