सूरत

VNSGU : EXCLUSIVE : पेपरलेस काम करने की बजाय बढ़ा दिया गया कागजों का ढेर

- प्रश्नपत्र के अलावा परीक्षा संबंधी अन्य सामग्री की भी तीन से चार गुना ज्यादा छपाई

2 min read
Aug 24, 2018
VNSGU : EXCLUSIVE : पेपरलेस काम करने की बजाय बढ़ा दिया गया कागजों का ढेर

सूरत.

वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय (वीएनएसजीयू) के प्रश्नपत्रों के अलावा परीक्षा सामग्री की छपाई में भी गड़बड़झाला चल रहा है। पेपरलेस कार्य करने की जगह परीक्षा सामग्री के नाम पर तीन से चार गुना कागजों का ढेर बढ़ाया जा रहा है। प्रश्नपत्र के अलावा परीक्षा संबंधी अन्य सामग्री भी तीन से चार गुना छपवाई जा रही है।
वीएनएसजीयू में परीक्षा सामग्री की छपाई में गड़बड़ी का मामला धीरे-धीरे उजागर हो रहा है। विश्वविद्यालय की परीक्षा में कई तरह की सामग्री का उपयोग होता है। इनमें प्रश्नपत्र, इन्हें रखने के कवर, मार्कशीट, मार्कशीट रखने के कवर, निरीक्षकों के रिमार्क के पेपर और अन्य पेपर सामग्री शामिल है। यह सामग्री निजी एजेंसी से छपवाई जाती है। अलग-अलग परीक्षाओं के लिए छपाई भी अलग-अलग होती है। इस छपाई का बिल दो करोड़ रुपए से अधिक आने के बाद जांच शुरू की गई कि इतना ज्यादा बिल कैसे आया। पता चला कि परीक्षार्थियों की संख्या से अधिक प्रश्नपत्र छपवाए गए। कई विषयों में परीक्षार्थी नहीं होने पर भी तीन से चार गुना प्रश्नपत्र छपवाए गए। इस मामले में राजस्थान पत्रिका की ओर से विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में पड़ताल की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र ही तीन से चार गुना नहीं छपवाए गए, अन्य परीक्षा सामग्री भी तीन से चार गुना छपावई गई। छपवाने के बाद इसे जबरदस्ती विभागों और परीक्षा केन्द्रों पर भेजा गयौ। विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों और परीक्षा में निरीक्षक की ड्यूटी करने वाले प्राध्यापकों ने बताया कि उन्हें परीक्षा के दौरान जरूरत से अधिक सामग्री दी जाती है। इस बारे में बार-बार विश्वविद्यालय प्रशासन को सूचित भी किया गया, लेकिन किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। मार्कशीट, मार्कशीट कवर, प्रश्नपत्र, प्रश्नपत्र कवर और अन्य सामग्री तीन से चार गुना अधिक परीक्षा के दौरान थमा दी जाती है।

ये भी पढ़ें

VNSGU : EXCLUSIVE : प्रश्नपत्रों की छपाई में बड़ा गड़बड़झाला पकड़ा गया

नहीं मांगा जाता हिसाब
निरीक्षकों ने बताया कि परीक्षा में एक-दो पेपर ही उपयोग में लिए जाते हंै। बाकी सामग्री अतिरिक्त पड़ी रहती है। इस सामग्री का कोई हिसाब भी नहीं मांगा जाता। आज तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह नहीं पूछा गया है परीक्षा के दौरान कितनी छपी हुई सामग्री उपयोग में ली गई। हर परीक्षा के दौरान अतिरिक्त सामग्री थमा दी जाती है। यह सामग्री अन्य परीक्षा के दौरान उपयोग में नहीं आती। विभागों में इसकी रद्दी का ढेर बढ़ता जा रहा है।

ये भी पढ़ें

MONSOON : लगी सावन की असली झड़ी
Published on:
24 Aug 2018 07:24 pm
Also Read
View All