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MONSOON : लगी सावन की असली झड़ी

- दिनभर कभी रिमझिम तो कभी तेज फुहारों से मौसम सुहाना

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MONSOON : लगी सावन की असली झड़ी

सूरत.

आधा से ज्यादा सावन सूखा बीतने के बाद अब सूरत में सावन की झड़ी लगी हुई है। सोमवार के बाद मंगलवार को भी सावन की घटाएं सूरत पर मेहरबान रहीं। सुबह से रात तक थम-थम कर कभी रिमझिम तो कभी तेज फुहारों की झड़ी ने शहर का मौसम सुहाना कर दिया। वराछा जोन में सबसे अधिक 20 मिमी बारिश हुई। सोमवार रात भी कई जोन में बारिश हुई थी। मंगलवार सुबह से आसमान में काले बादल छाए रहे। सुबह ही रिमझिम की शुरुआत हो गई। यह सिलसिला रुक-रुक कर दिनभर चला। सेंट्रल जोन में 7 मिमी, वराछा में 20 मिमी, रांदेर में 9 मिमी, कतारगाम में 6 मिमी, उधना में 4 मिमी, लिम्बायत में 8 मिमी और अठवा जोन में 5 मिमी बारिश दर्ज की गई। सावन के आखिरी दौर में इस बारिश से गर्मी छूमंतर हो गई है। पारा सोमवार के मुकाबले दो डिग्री लुढ़क गया। मंगलवार को शहर का अधिकतम तापमान 27.4 डिग्री और न्यूनतम 22.4 डिग्री रहा। हवा में नमी 93 प्रतिशत और गति 12 किमी प्रतिघंटे दर्ज की गई। सोमवार को तापमान क्रमश: 29.6 डिग्री और 25.6 डिग्री था।

उकाई का लेवल बढ़ा
बारिश से उकाई का लेवल भी बढऩे लगा है। कैचमेंट विस्तार में हो रही बारिश के कारण डेम का लेवल बढ़ रहा है। सोमवार को उकाई का लेवल 305.08 मीटर था, जो मंगलवार को बढ़कर 305.90 मीटर दर्ज किया गया। डेम में 11,684 क्यूसेक पानी का इनफ्लो है, जबकि 600 क्यूसेक पानी आउटफ्लो हो रहा है।

इस साल अब तक सूरत में मानसून कमजोर रहा है। मौसम विभाग की मानसून सामान्य रहने की भविष्यवाणी पर किसानों के साथ सभी ने राहत की सांस ली थी, लेकिन मानसून कमजोर रहने के कारण चिंता बढऩे लगी है। पिछले साल के मुकाबले इस साल अब तक कम बारिश हुई है। उकाई के कैचमेंट विस्तार में कम बारिश के कारण उकाई बांध का लेवल भी पिछले साल के मुकाबले कम है।
इस साल गर्मी की शुरुआत में ही शहर का तापमान 35 डिग्री तक पहुंच गया था। मार्च और अप्रेल में पारा 40 डिग्री के पार चला गया। गर्मी से बेहाल लोग बारिश का इंतजार कर रहे थे। मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की थी कि हर साल की तरह इस बार भी जून के दूसरे सप्ताह में शहर में मानसून दस्तक दे देगा। पिछले पांच साल में शहर में 8 जून से 15 जून के बीच मानसून का आगमन हुआ था, लेकिन इस साल मानसून लेट हो गया और 21 से 25 जून के बीच सूरत पहुंचा। कारण यह बताया गया कि अरब सागर के मानसून को सपोर्ट करने वाला सिस्टम बंगाल की खाड़ी में विकसित नहीं हो पाया। इससे इसके दक्षिण गुजरात आने में देर हुई। मानसून की शुरुआत में शहर और दक्षिण गुजरात में रुक-रुककर बारिश हुई। पिछले साल के मुकाबले इस साल जून में शहर में कम बारिश हुई। पिछले साल जून में शहर में 302.6 मिमी बारिश हुई थी, जबकि इस साल जून में 201 मिमी ही हुई। जुलाई में मानसून ने रफ्तार पकड़ी और जमकर बारिश हुई। जून की कसर जुलाई में पूरी हो गई। मौसम विभाग के अनुसार शहर में जुलाई में 753 मिमी बारिश हुई। पिछले साल जुलाई में 355.2 मिमी बारिश हुई थी। जुलाई की बारिश ने सभी को खुश कर दिया। लगा था कि मानसून अब सक्रिय रहेगा, लेकिन बारिश पर ब्रेक लग गया। अगस्त में अब तक सिर्फ रिमझिम हुई है। सावन अब तक झूमकर नहीं बरसा है। 13 अगस्त तक शहर में मात्र 29 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि पिछले साल अगस्त में 383.9 मिमी बारिश हुई थी। उकाई के कैचमेंट विस्तार में भी कम बारिश हुई है। इससे पिछले साल के मुकाबले इस साल उकाई डेम कम भर पाया है। पिछले साल 13 अगस्त तक उकाई डेम का लेवल 316.29 मीटर तक पहुंच गया था। इस साल 13 अगस्त तक यह लेवल 300.36 मीटर तक ही पहुंचा है। आने वाले दिनों में भी बारिश के यही हाल रहे तो दिक्कत हो सकती है।


अगस्त तक बारिश
2017
माह मिमी
जून 302.6
जुलाई 355.2
अगस्त 383.8
कुल 1041

2018
जून 201
जुलाई 753
अगस्त 29 (13 अगस्त तक)
कुल 983 (13 अगस्त तक)
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(वर्ष 2017 में 13 अगस्त तक उकाई बांध का लेवल 316.29 मीटर रहा था, जबकि इस साल इसी तारीख तक यह 300.36 मीटर है।)