स्कूल से 14 लाख की धोखाधड़ी का मामला
सूरत. विद्यार्थियों की फीस के 14 लाख रुपयों का गबन करने के मामले में आरोपित महिला प्रिंसिपल की अग्रिम जमानत याचिका मंगलवार को सेशन कोर्ट ने नामंजूर कर दी।
पुलिस के मुताबिक नवागाम सीतारामनगर निवासी रोजी रेजी सेम्युअल के खिलाफ गोपीपुरा रत्नसागर जैन विद्या स्कूल के ट्रस्टी की ओर से धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज किए जाने के बाद उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान लोकअभियोजक दीपेश दवे ने दलीलें पेश कर याचिका का विरोध किया। अंतिम सुनवाई के बाद मंगलवार को कोर्ट ने जमानत याचिका नामंजूर कर दी। रोजी पर आरोप है कि उसने स्कूल के प्री-प्राइमरी और नर्सरी सेक्शन की इंचार्ज प्रिसिपल रहते हुए विद्यार्थियों की फीस के 14 लाख रुपए से अधिक स्कूल के अकाउंट में जमा नहीं करवाए।
सात लाख की रिश्वत लेने के मामले में तहसीलदार को जमानत नहीं
सूरत. जमीन की गिनती में सरकारी रेकर्ड पर दर्ज गलती को सुधार के लिए सात लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार मजूरा के तहसीलदार राजेन्द्र फतेसिंह चौधरी को कोर्ट ने राहत देने से इनकार करते हुए नियमित जमानत याचिका नामंजूर कर दी।
वेसूगांव की एक जमीन के मालिक की जमीन की गिनती में सरकारी रेकर्ड पर गलती दर्ज थी। इसे सुधारने के लिए उसने अर्जी की थी और मामले की सुनवाई मजूरा तहसीलदार कर रह रहे थे। तहसीलदार राजेन्द्र फतेसिंह चौधरी ने जमीन मालिक के पक्ष में आदेश करने के लिए सात लाख रुपए की रिश्वत की मांग की। जमीन मालिक ने ब्यूरो का संपर्क किया और शिकायत की। ब्यूरो के अधिकारियों ने जाल बिछाया। तहसीलदार ने जमीन मालिक के पक्ष में आदेश करते हुए सात लाख रुपए अपने चालक नरेशकुमार बन्सीलाल खटीक को देने के लिए कहा। जैसे ही चालक ने सात लाख रुपए स्विकार किए ब्यूरो ने चालक को धर दबोचा था, जबकि तहसीलदार भाग निकाला और बाद में उसने समर्पण किया था। न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद उसने कोर्ट से नियमित जमानत के लिए याचिका दायर की थी। लोकअभियोजक सुरेश पाटील की दलीलें और जांच अधिकारी का हलफनामे को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने मंगलवार को याचिका नामंजूर कर दी।