3 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सात लाख की रिश्वत लेने के मामले में तहसीलदार को जमानत नहीं

जमीन की गिनीत में गलती सुधार के लिए रिश्वत मांगने का है आरोप

2 min read
Google source verification
logo

सात लाख की रिश्वत लेने के मामले में तहसीलदार को जमानत नहीं

सूरत. जमीन की गिनती में सरकारी रेकर्ड पर दर्ज गलती को सुधार के लिए सात लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार मजूरा के तहसीलदार राजेन्द्र फतेसिंह चौधरी को कोर्ट ने राहत देने से इनकार करते हुए नियमित जमानत याचिका नामंजूर कर दी।


वेसूगांव की एक जमीन के मालिक की जमीन की गिनती में सरकारी रेकर्ड पर गलती दर्ज थी। इसे सुधारने के लिए उसने अर्जी की थी और मामले की सुनवाई मजूरा तहसीलदार कर रह रहे थे। तहसीलदार राजेन्द्र फतेसिंह चौधरी ने जमीन मालिक के पक्ष में आदेश करने के लिए सात लाख रुपए की रिश्वत की मांग की। जमीन मालिक ने ब्यूरो का संपर्क किया और शिकायत की। ब्यूरो के अधिकारियों ने जाल बिछाया। तहसीलदार ने जमीन मालिक के पक्ष में आदेश करते हुए सात लाख रुपए अपने चालक नरेशकुमार बन्सीलाल खटीक को देने के लिए कहा। जैसे ही चालक ने सात लाख रुपए स्विकार किए ब्यूरो ने चालक को धर दबोचा था, जबकि तहसीलदार भाग निकाला और बाद में उसने समर्पण किया था। न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद उसने कोर्ट से नियमित जमानत के लिए याचिका दायर की थी। लोकअभियोजक सुरेश पाटील की दलीलें और जांच अधिकारी का हलफनामे को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने मंगलवार को याचिका नामंजूर कर दी।



कथीरिया को न्यायिक हिरासत में भेजा


सूरत. राजद्रोह मामले में गिरफ्तार पास समन्वयक अल्पेश कथीरिया को मंगलवार शाम क्राइम ब्रांच पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। पुलिस की ओर से रिमांड की मांग नहीं की गई। कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।


अमरोली थाने में दर्ज तीन साल पुराने राजद्रोह के मामले में सोमवार को क्राइम ब्रांच पुलिस ने अल्पेश को साबरमती जेल से ट्रांसफर वारंट से गिरफ्तार किया था। देर रात पुलिस उसे लेकर सूरत पहुंची। मंगलवार शाम उसे जेएमफएसी कोर्ट के समक्ष पेश किया गया। पुलिस की ओर से रिमांड की मांग नहीं करने पर कोर्ट ने अभियुक्त को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। गौरतलब है कि पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान वर्ष 2015 में पुलिस के खिलाफ भडक़ाऊ बयान देने को लेकर अमरोली थाने में राजद्रोह का मामला दर्ज करते हुए क्राइम ब्रांच पुलिस ने हार्दिक पटेल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद विपुल देसाई और चिराग देसाई नाम के युवकों को भी गिरफ्तार किया गया। अब तीन साल बाद अल्पेश कथीरिया की इस मामले में गिरफ्तारी की गई है।