Sankat Mochan Hanuman Mandir Varanasi भारत में कई चमत्कारी मंदिर हैं, उनसे जुड़ी हैरतंगेज घटनाएं जन-जन की जुबान पर है। लेकिन देश के उस मंदिर के बारे में आप कितना जानते हैं जहां तुलसीदासजी को हनुमानजी ने दर्शन दिए थे और जहां तुलसीदास जी ने रामचरितमानस और हनुमान चालीसा की रचना की थी। बता दें कि जिस शहर में यह मंदिर है, उसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी कनेक्शन है। आइये जानते हैं इस विशेष शहर और प्रसिद्ध मंदिर के बारे में...
हम जिस विशेष शहर और विशेष मंदिर की बात कर रहे हैं, वह उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में है और इस मंदिर का नाम संकट मोचन हनुमान मंदिर है। इस मंदिर को 16वीं सदी में संत तुलसीदास ने बनवाया था। मान्यता है कि यहीं संत तुलसीदास ने रामचरितमानस और हनुमान चालीसा की रचना की थी और तब हनुमानजी ने उन्हें इसी जगह पर दर्शन दिए थे। मान्यता है कि उन्होंने ही तुलसीदास जी का श्रीरामजी से मिलन करवाने में भी सहयोग किया था। बाद में तुलसीदास जी ने इसी जगह पर हनुमान मंदिर का निर्माण कराया। बाद में इस मंदिर को संकटमोचन मंदिर वाराणसी के नाम से जाने जाना लगा।
गोस्वामी तुलसीदास जी और हनुमान जी को लेकर कई रोचक किस्से लोगों में प्रचलित है। इसी में से एक मान्यता है कि माता सीता ने हनुमान जी की रामभक्ति देखकर उन्हें कलियुग के अंत तक यहां रहकर श्रीराम भक्तों की मदद करने का आदेश दिया था। यह भी मान्यता है कि भारत भूमि पर जब मुगल अकबर का शासन था, तब तुलसीदास जी पर भी भीषण अत्याचार किए थे। इस दौरान हनुमान जी तुलसीदास जी की मदद करने कई बार पहुंचे थे। बाद में तुलसीदास जी ने हनुमान जी को समर्पित संकटमोचन मंदिर वाराणसी बनवाया। आइये जानते हैं संकट मोचन हनुमान मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य …
मान्यता के अनुसार इसी जगह पर जब गोस्वामी तुलसीदास रामचरितमानस की रचना कर रहे थे और अस्सी घाट पर इसके अध्याय पढ़कर सुनाया करते थे। साथ ही राम भजन करते थे। उनकी कथा सुनने एक वृद्ध कुष्ठ रोगी प्रतिदिन सबसे पहले आता और अंत में जाता। वह सभी भक्तों के पीछे अंत में बैठा करता था। साथ ही तुलसीदास जी रोज सुबह पीपल के वृक्ष को पानी दिया करते थे। एक दिन उस पीपल के वृक्ष पर बैठे पिशाच ने उनसे पूछा कि क्या वे श्रीराम से मिलना चाहते हैं?
इस पर तुलसीदास जी ने पूछा कैसे तब पिशाच ने उत्तर दिया कि हनुमान मिलवाएंगे। उसने यह भी बताया कि आपकी रामकथा सुनने जो वृद्ध कुष्ठ रोगी प्रतिदिन आता है, वही भक्त हनुमान हैं। यह सुनकर तुलसीदास अगली बार रामकथा सुनाने के बाद जब सभी लोग चले गए तब उस वृद्ध का पीछा करने लगे। हनुमान जी समझ गए कि तुलसीदास पीछा कर रहे हैं तो वे रूक गए और तुलसीदास जी उनके चरणों में गिर गए और असली रूप में आने की प्रार्थना की।
इस पर हनुमान जी ने अपने असली रूप में उन्हें दर्शन दिए। तब महर्षि तुलसीदास जी ने पहली बार हनुमान जी के ही सामने अपनी लिखी हनुमान चालीसा का पाठ करके सुनाया। इसके बाद श्रीराम से मिलने का मार्ग पूछा। फिर हनुमानजी ने उन्हें बताया कि श्रीराम और उनके छोटे भाई लक्ष्मण चित्रकूट में उन्हें मिलेंगे। इसलिए वे उनसे मिलने चित्रकूट जाएं। इसके बाद हनुमान जी तुलसीदास जी के जीवन को एक नयी दिशा देकर वहां से चले गए थे। हनुमान जी जिस घाट पर तुलसीदास जी द्वारा रामचरितमानस का पाठ सुनने आया करते थे, वहीं पर तुलसीदास जी ने संकट मोचन मंदिर का निर्माण कराया।
(नोट-इस आलेख में दी गई जानकारियां पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं, www.patrika.com इसका दावा नहीं करता। इसको अपनाने से पहले और विस्तृत जानकारी के लिए किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।)