
Tikamgarh news: गैस कंपनियों ने अब 14 किलो एलपीजी सिलेंडर के कनेक्शन देना बंद कर दिया है। इसकी जगह कंपनी 10 किलो गैस वाले जिप लाइट सिलेंडर के कनेक्शन दे रही है। यह कनेक्शन लोगों की जेब पर सीधा असर डाल रहे है। यह कनेक्शन लेने के बाद लोगों को गैस के लिए डेढ़ गुना तक अधिक दाम खर्च करने होंगे। अमरीका ईरान युद्ध के बाद शुरू हुई गैस की किल्लत के बाद से भारत गैस कंपनी ने अब 14 किलो एलपीजी गैस सिलेंडर वाले कनेक्शन देने बंद कर दिए है।
15 मार्च के बाद से कंपनी ने एक भी नया कनेक्शन नहीं दिया है। बताया जा रहा है कि यह कनेक्शन लेने जिले में 7 हजार से अधिक आवेदन लंबित है। इनकी जगह कंपनी ने दो माह पूर्व 10 किलो एलपीजी वाले नए जिप लाइट सिलेंडर के कनेक्शन देने शुरू किए है। यह कनेक्शन आम उपभोक्ताओं के लिए बहुत महंगे है और लोग इसे लेने भी आगे नहीं आ रहे है। बताया जा रहा है कि जिप लाइट सिलेंडर के जिले में मात्र 35 से 40 कनेक्शन ही हुए हैं।
भारत गैस कंपनी द्वारा रेग्यूलर गैस कनेक्शन के लिए 5500 रुपए लिए जाते हैं। इसमें कंपनी सिलेंडर के साथ ही गैस चूल्हा और रेग्यूलेटर देती है। बताया जाता है कि इसमें 1500 से 2000 के बीच में गैस चूल्हा ही होता है। वहीं जिप लाइट कनेक्शन में कंपनी केवल एक 10 लीटर का गैस सिलेंडर और रेग्यूलेटर ही दे रही है, इसमें चूल्हा नहीं दिया जा रहा है और रुपए भी पूरे 5500 लिए जा रहे हैं। वहीं इस सिलेंडर को रिफिल कराने भी उपभोक्ताओं को हर माह डेढ़ गुना रुपए चुकाने होंगे। विदित हो कि वर्तमान में 14 किलो का गैस सिलेंडर 1022 रुपए में मिल रहा है। ऐसे में यह गैस 73 रुपए किलो मिल रही है। वहीं 10 किलो के सिलेंडर की रिफिल 1800 रुपए में हो रही है। ऐसे में यह गैस 180 रुपए लीटर होगी। यह कनेक्शन लेने से लोगों को ज्यादा जेब ढीली करने होगी।
मऊचुंगी निवासी अजय ने बताया कि उनके घर में एक ही गैस कनेक्शन था। अब भाई ने तखा में नया मकान बनवा लिया है और वहां शिफ्ट हो गए हैं। ऐसे में उन्हें भी गैस की जरूरत है, लेकिन कंपनी पुराने वाले कनेक्शन नहीं दे रही है। नया कनेक्शन बहुत महंगा है और एक माह में लगभग दो गुना खर्च बढ़ जाएगा। इतनी महंगी गैस जलाना बस की बात नहीं है। विदित हो कि एक ओर सरकार चूल्हा जलाना बंद करने के लिए उज्ज्वला जैसे योजना चल रही है तो दूसरी ओर रेग्यूलर कनेक्शन बंद होने से अब लोग न चाहकर भी चूल्हा जलाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि यह कंपनी का निर्णय है और हम कुछ नहीं कर सकते हैं।