MP News: मध्य प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियां (Political appointments) शुरू हो चुकी है। इसी में पार्टी से निष्कासित भाजपा नेता को बोर्ड अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
MP Political appointments: भाजपा में कार्यकर्ता सर्वोपरी है। समर्पित कार्यकर्ता को पार्टी में पूरा सम्मान दिया जाता है। आमतौर पर संगठन की बैठक में यह पाठ पढ़ाने वाली भाजपा ने अब पार्टी का चुनाव में विरोध करने वाले पूर्व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य महेश केवट (Mahesh Kewat) को मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष (MP Fishermen Welfare Board) बना दिया है। ओरछा नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते उन्हें पार्टी से 6 साल के निष्कासित किया गया था।
उनकी इस नियुक्ति के बाद जहां पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है तो पद पर बैठे जिम्मेदार भी पार्टी के इस आदेश को एक अनुशासित कार्यकर्ता की तरह मौन रह कर स्वीकार करते दिखाई दे रहे और जवाब देने से भी बच रहे है। 24 अप्रैल की देर शाम मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग के अपर सचिव सुनील मड़ावी ने ओरछा के महेश केवट को मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाए जाने का आदेश जारी किया है। (MP News)
जैसे ही यह आदेश जारी हुआ तो ओरछा के साथ ही निवाड़ी के भी भाजपा कार्यकर्ताओं के अंदर इसके विरोध के साथ ही चर्चाएं शुरू हो गई कि यह नियुक्ति कैसे हुई। जब इन्हें 6 साल के लिए निष्कासित किया गया था और पार्टी में अब तक वापसी नहीं हुई तो यह पद कैसे मिल गया। इस आदेश के बाद से पार्टी के पदाधिकारी खुल कर तो कुछ नहीं कर रहे है, लेकिन अंदर ही अंदर इस मामले में न केवल चर्चाएं की जा रही है, बल्कि हर फोरम पर शिकायतें भी भेजी जा रही है।
नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों एवं पार्टी प्रत्याशियों के विरोध में चुनाव लड़ने पर निवाड़ी जिले के कुल 20 पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को पार्टी से निष्कासित किया गया था। 27 जून 2022 को तत्कालीन प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी ने तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा के निर्देशन पर इन लोगों को पार्टी से निष्कासित किया था। इसमें ओरछा नगर परिषद में पार्टी विरोध काम करने पर महेश केवट को भी निष्कासित किया गया था।
इधर मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष बनाए गए महेश केवट से इस मामले में बात की तो उन्होंने 27 जून 2022 को प्रदेश महामंत्री द्वारा जारी किए गए निष्कासन के पत्र को ही फर्जी बता दिया। उनका कहना था कि यह कांग्रेस भ्रम फैलाने का काम कर रही है। मैं 30 सालों से पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता हूं। 1984 में संघ में मुख्य शिक्षक था। यह फर्जी आदेश है। उनसे कहा गया कि जब यह आदेश जारी हुए तो इसे मीडिया के माध्यम से प्रकाशित किया था, तब आपने आपत्ति वर्ज क्यों नहीं कराई। इस पर केवट का कहना था कि उस समय ध्यान नहीं दिया।
इस मामले में अब जिम्मेदार भी सही बात करने से कतराते दिखाई दे रहे है। वह भी खुद को संगठन का समर्पित और निष्ठावान दिखाते हुए जवाब नहीं दे रहे है। इसके लिए जिला अध्यक्ष राजेश पटैरिया से बात करनी चाही तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। मैसेज कर मामला बता कर पक्ष जानने का प्रयास किया तो प्रति उत्तर नहीं दिया। वहीं निवाड़ी के जिला प्रभारी दीपक भदौरिया से बात की ती उनका कहना था कि इस संबंध में जिलाध्यक्ष ही बात करने के लिए अधिकृत है। वह संगठन के आदमी है. ऐसे में इस विषय पर पक्ष रहने के लिए अधिकृत नहीं है। (MP News)