
S Janaki Unknown Facts: भारतीय संगीत जगत में एस. जानकी का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। बात दें, संगीत जगत की मशहूर गायिका एस. जानकी का कर्नाटक के मैसूर के एक अस्पताल में बीते शनिवार 88 की उम्र में निधन हो गया। अपनी मधुर आवाज और सुरीले अंदाज के लिए जानी जाने वाली एस. जानकी ने टॉलीवुड और बॉलीवुड समेत भारतीय सिनेमा के लिए हजारों गाने गाए थे। म्यूजिक इंडस्ट्री में एस. जानकी को 'जानकी अम्मा' के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि, हिंदी दर्शकों का एक बड़ा वर्ग उनके बारे में बहुत कम जानता है। आइए जानते हैं एस. जानकी से जुड़ी 10 खास बातें।
एस. जानकी ने अपने म्यूजिक करियर की शुरुआत लगभग 70 साल पहले 1957 में की। उन्होंने अपने फिल्मी करियर का पहला गाना तेलुगु फिल्म 'एमएलए' के लिए रिकॉर्ड किया गया था। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
एस जानकी एक ऐसी फीमेल सिंगर थीं, जिनको 20 भाषाओं का ज्ञान था और इसी के चलते उनकी गायकी भी बहुभाषी थी। बता दें कि उन्होंने तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, हिंदी, उड़िया, बंगाली, मराठी, गुजराती, संस्कृत, तुलु समेत 20 से अधिक भारतीय भाषाओं में गाने गाए। हर भाषा के उच्चारण पर उनकी पकड़ उन्हें दूसरे गायकों से अलग बनाती थी।
'जानकी अम्मा' के नाम से मशहूर इस सिंगर ने करीब सात दशकों के अपने संगीत करियर में फिल्मों, एल्बम, टेलीविजन और रेडियो के लिए 48,000 से ज़्यादा गाने रिकॉर्ड किए। इनमें 20 भारतीय भाषाओं में सोलो, डुएट, कोरस और टाइटल ट्रैक शामिल हैं। उन्हें भारतीय सिनेमा की सबसे अधिक रिकॉर्डिंग करने वाली फीमेल सिंगर्स में से एक माना जाता है। इतना ही नहीं उनकी आवाज की खासियत थी कि वो रोमांटिक, भक्ति, लोक और शास्त्रीय संगीत हर जॉनर के गानों में फिट बैठती थी और लोग उनके गानों को पसंद करते थे।
जानकारी के लिए बता दें कि एस. जानकी को भारतीय संगीत में उनके विशेष योगदान के लिए चार बार सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इतना ही नहीं इसके अलावा उन्हें कई राज्यों के फिल्म पुरस्कार और लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड्स से भी सम्मानित किया गया।
एस. जानकी एक स्वाभिमानी महिला थीं और शायद यही वजह थी कि जब साल 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित करने की घोषणा की, तन उन्होंने यह सम्मान स्वीकार नहीं किया था। उनका मानना था कि संगीत जगत में इतने लंबे समय तक योगदान देने के बाद उनको ये सम्मान काफी देर से मिला। एस. जानकी द्वारा किये गए इस फैसले की पूरे देश में काफी चर्चा हुई थी।
देखा जाए तो एस.जानकी ने अपने करियर में दक्षिण भारतीय फिल्मों में ज्यादा योगदान दिया, लेकिन उनकी आवाज हिंदी दर्शकों तक भी पहुंची। उन्होंने हिंदी फिल्मों के लिए भी कई यादगार गीत गाए। इन गानों में फिल्म 'मेरी जंग' का उनका गाना 'बोल बेबी बोल, रॉक एंड रोल' और फिल्म 'साहब' का गाना 'यार बिना चैन कहां रे' हिंदी दर्शकों के बीच आज भी पॉपुलर हैं। इसके अलावा उन्होंने 'आखिरी रास्ता', 'मंजिल' और 'तवायफ' जैसी बॉलीवुड की लोकप्रिय फिल्मों में भी गाने गाए हैं।
एस. जानकी ने अपने करियर में कई महान संगीतकारों के साथ काम किया, जिनमें जी. वेंकटेश, अरुण राघवन, जी. रामनाथन, शंकर-जयकिशन, जी. सत्यम, इलैयाराजा, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और बप्पी लाहिड़ी शामिल हैं। उन्होंने ए.आर. रहमान और आर.डी. बर्मन जैसे भारत के कुछ सबसे मशहूर संगीतकारों के साथ भी अलग-अलग भाषाओं में काम किया। खासतौर पर इलैयाराजा के साथ उनकी जोड़ी हिट रही। बाद में उन्होंने ए.आर. रहमान सहित नई पीढ़ी के संगीतकारों के साथ भी काम किया।
एस जानकी सिर्फ एक बेहतरीन गायिका ही नहीं, बल्कि अपनी आवाज से हर गाने में जान डालने वाली गायिका माना जाता था।। यही वजह थी कि उनके गाए गाने अलग-अलग पीढ़ियों के बीच आज भी लोकप्रिय हैं।
फिल्मी गीतों के अलावा एस. जानकी ने देश-विदेश में कई लाइव कॉन्सर्ट किए। उनके कॉन्सर्ट्स में भारी भीड़ में संगीत प्रेमी पहुंचते थे। उनको लाइव गाते हुए सुनना अपने आप में एक यादगार अनुभव माना जाता था।
अपने जीवन के आखिरी दिनों में एस. जानकी ने गायकी से दूरी जरूर बना ली थी, लेकिन उनका संगीत आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जीवित है। आज की जेनरेशन के कई सिंगर्स उन्हें प्रेरणा मानते हैं।
भारतीय संगीत जगत में एस. जानकी का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। बता दें, S. जानकी का अंतिम संस्कार मैसूर के एचडी कोटे तालुक स्थित उनके पारिवारिक फार्महाउस में रविवार यानी आज शाम 5 बजे किया जाएगा। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में फैंस और संगीत प्रेमी पहुंच रहे हैं।
दक्षिण भारतीय सिनेमा में उन्हें जितनी लोकप्रियता मिली, उतनी ही उनकी आवाज का जादू कई दूसरी भाषाओं में भी देखने को मिला। अपनी मधुर आवाज, भावपूर्ण गायकी और अलग-अलग भाषाओं पर शानदार पकड़ के दम पर उन्होंने करोड़ों श्रोताओं के दिलों में खास जगह बनाई।