टोंक. छान में आजाद हिंद गोशाला की ओर से महंत मनीषदास के सान्निध्य में चल रही नानी बाईरो मायरो का वाचन पंडित अनिरुद्ध ने किया।
टोंक. छान में आजाद हिंद गोशाला की ओर से महंत मनीषदास के सान्निध्य में चल रही नानी बाईरो मायरो का वाचन पंडित अनिरुद्ध ने किया। इसमें श्याम सखा परिवार टोंक के अध्य्क्ष सुनील बंसल ने शिरकत की। आजाद हिंद गोशाला की ओर से सुनील का साफा बंधवाकर व माला पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान बंसल ने कहा की ऐसे धार्मिक कार्यक्रम होते रहना चाहिए। इससे आपस में जुड़ाव रहता है। मानव की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। सुनील बंसल ने गोशाला के लिए ग्यारह हजार रुपए देने की घोषणा की।
इस दौरान शैलेन्द्र गर्ग, योगेश बंसल, केशव पारीक, सोनू, सत्यनारायण आदि मौजूद थे। इधर, नानी बाई रो मायरा कार्यक्रम में लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश महासचिव अकबर खान भी पहुंचे। उन्होंने धुआंकला धन्नाभगत शमशेर सिंह से आशीर्वाद लिया। इस दौरान अकबर खान ने कहा कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। अकबर ने 21 हजार रुपए देने की घोषणा की। अकबर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने भले ही टोंक रेल के लिए इंकार कर दिया हो, लेकिन रेल नहीं रुकेगी, कोई सी भी सरकार दे रेल तो आकर रहेगी।
इस दौरान अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन के प्रदेश सचिव जावेद खान, उपाध्यक्ष अशोक विश्नोई, बलजीत चौधरी, सोनू चौधरी, योगेश, सलीम खान, बल्लू पठान, सुनिल शर्मा, पिंटू, महेंद्र, शोजी राम, विनोद आदि मौजूद थे।
कलश यात्रा निकाली
मालपुरा. श्रीरामकथा आयोजन समिति, कामधेनु कृपा इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स एवं रोटरी क्लब मालपुरा ग्रीन की ओर से महेश सेवा सदन में होने वाली संगीतमय श्रीरामकथा की शुरुआत रविवार को नई मण्डी स्थित केदारनाथ मन्दिर से कलश यात्रा के साथ हुआ। बैण्डबाजे की मधुर धुन के साथ महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर कलश यात्रा निकाली। जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया।
व्यासपीठ से राजन की ओर से प्रतिदिन संगीतमय रामकथा पर प्रवचन दिए जाएंगे। इस दौरान डॉ. राजकुमार वर्मा, नवरतन बिरला, विवेक पारीक, कपिल कान्त पाठक, पवन सोनी, पुष्पेन्द्र पारीक, मधुसूदन पारीक, राकेश नेवटा मौजूद रहे।
जयंती मनाने पर चर्चा
टोंक. स्वर्णकार समाज टोंक की बैठक जिलाध्यक्ष छीतरलाल की अध्यक्षता में बड़ा कुआं स्थित राधाकृष्ण मंदिर में हुई। इसमें अजमीढ़ जयंती टोंक तहसील अध्यक्ष रामगोपाल सोलिवाल के सान्निध्य में मनाने का निर्णय किया गया। बैठक में मोहनलाल, गोपाल जडिय़ा, सुभाष, नरेद्र, बनवारी आदि मौजूद थे।