बस स्टैण्ड पर संचालित रैन बसेरे में सुविधाओं का अभाव है। यहां खाना-पीने के स्थान पर महज सोने की व्यवस्था है।
जलालुद्दीन खान/ राकेश पालीवाल
टोंक. नगर परिषद ने खुले आसमां तले रात बिता रहे व असहाय लोगों के लिए शहर में रैन बसेरा तो संचालित कर दिया, लेकिन जरूरतमंदों का लाभ नहीं मिल पा रहा। इसका कारण अग्निशमन केन्द्र में संचालित रैन बसेरा शहर के बस स्टैण्ड व अस्पताल से दूर है।
ऐसे में मरीजों के साथ आए तीमारदार दूर जाने के स्थान पर अस्पताल परिसर में ही खुले आसमां तले रात बिताने को मजबूर हैं। बस स्टैण्ड पर संचालित रैन बसेरे में सुविधाओं का अभाव है। यहां खाना-पीने के स्थान पर महज सोने की व्यवस्था है। राज्य सरकार के निर्देश पर नगरपरिषद की ओर से शहर में दो स्थानों पर रैन बसेरा शुरू किया है।
इनमें अग्निशन केन्द्र में सुविधाएं तो संतोषजक हैं, लेकिन शहर से दूर होने व प्रचार-प्रसार के अभाव में जरूरतमंदों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। चौंकाने वाली बात है कि मंगलवार रात नौ बजे तक इसमें महज एक जना सोता हुआ मिला। जबकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अस्पताल व घंटाघर क्षेत्र में खाना बदोश लोग खुले में सो रहे थे।
इधर, बस स्टैण्ड परिसर में संचालित रैन बसेरे में भोजन की ना ही पानी की व्यवस्था है। सर्द रात गुजारने के लिए आए लोगों को भोजन तथा पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। लगाए गए रजाई-गद्दे भी पुराने हैं।
नहीं जला रहे अलाव
नगर परिषद की ओर से बस स्टैण्ड पर संचालित रैन बसेरे में लकडिय़ों का भी अभाव नजर आया। हालांकि लकडियां तो मंगवा रखी थी, लेकिन उन्हें जलाया नहीं गया। उल्लेखनीय है कि अग्निशमन कार्यालय में 32 लोगों के ठहरने व्यवस्था है। जबकि बस स्टैण्ड पर महज 20 लोग ही रुक सकते हैं।
यहां वर्षों से ताला
सआदत अस्पताल परिसर में एक करोड़ की लागत से बनी धर्मशाला पर ढाई वर्षों से ताला लटका है। ऐसे में मरीजों के परिजन आसमां तले रात बिताने पर विवश हैं। जबकि धर्मशाला का निर्माण मरीजों व तीमारदारों को आराम की सुविधा के लिए कराया गया था।
धर्मशाला के अभाव में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अस्पताल, जनाना समेत सर्जिकल, मेडिकल व अन्य वार्डों में भर्ती मरीजों के परिजनों को खुले में रात बिताना पड़ रहा है।
यहां भी खुले रैन बसेरा
प्रसूताओं व शिशुओं को आधुनिक सुविधाएं देने के लिए 16 करोड की लागत से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य अस्पताल का निर्माण कराया गया है। इसकेे बावजूद अस्पताल परिसर में मरीजों के ठहरने केे लिए धर्मशाला का निर्माण नहीं कराया गया। इससे मरीजों के साथ आए परिजन खुले में रात काट रहे है।
अग्निशमन केन्द्र में संचालित रैन बसेरे में आए लोगों को खाने, पीने समेत बिस्तरों की उचित सुविधा दी जा रही है। कई जरूरतमंद यहां आकर सुविधा का लाभ ले भी रहे हैं।
शैतानसिंह मीना, रैन बसेरा प्रभारी टोंक।