हड़ताल जारी रहने तक जिले के सभी निजी चिकित्सक विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर चिकित्सा कार्य करेंगे।
टोंक. सरकारी चिकित्सकों की हड़ताल के चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या घटने लगी है। दूरदराज से आए गम्भीर रोगियों को उपचार के नाम पर महज परामर्श मिल रहा है। ऐसे में बुधवार को सरकारी अस्पतालों के गलियारे सूने रहे। हालांकि आयुर्वेद, आयुष समेत आधा दर्जन चिकित्सकों ने मरीजों को परामर्श दिया।
इसके बावजूद गम्भीर रोगियों को उपचार के लिए भटकना पड़ा। दूसरी ओर जिले के निजी चिकित्सकों ने भी मांगों के समर्थन में आन्दोलन जारी रहने तक काली पट्टी बांधकर उपचार करने का निर्णय किया है। उल्लेखनीय है कि हड़ताल के पांचवें दिन भी चिकित्सक अस्पताल नहीं आए।
इससे ओपीडी का आंकड़ा कम रहा। नर्सेज ठाले बैठे रहे। चिकित्सकों के नहीं आने की सूचना से प्रसूताओं व अन्य मरीजों ने सरकारी अस्पतालों से किनारा कर लिया। महज पांच सामान्य प्रसव ही बुधवार को हो सके। जटिल प्रसव रैफर कर दिए गए। भर्ती प्रसूताएं भी छुट्टी कराकर घरों को लौट गई।
यही स्थिति शिशु वार्ड में दिखाई दी। चिकित्सकों के नहीं आने से किसी बालक को भर्ती नहीं किया गया। आयुर्वेद व आयुष चिकित्सकों की लिखी दवाइयां भी आयुर्वेदिक होने से अस्पताल के नि:शुल्क काउण्टरों पर उपलब्ध नहीं हुई।
काली पट्टी बांध किया उपचार
सरकारी चिकित्सकों की मांगों के समर्थन में को निजी चिकित्सक भी उतर आए। इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष विजेन्द्र त्रिपाठी व जिला सचिव डॉ. राजेश मालपानी ने बताया कि सरकार को चिकित्सकों की मंागों का जल्द निराकरण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि हड़ताल जारी रहने तक जिले के सभी निजी चिकित्सक विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर चिकित्सा कार्य करेंगे।
मिले अधिकार
इधर, जिले में लगे प्रथम श्रेणी नर्सेज का कहना है कि सरकार उन्हें दवा लिखने का अधिकार दे तो हजारों रोगियों की समय रहते जान बचाई जा सकती है। कर्मचारियों का कहना है कि लम्बे समय तक चिकित्सा कार्य करते हुए उन्हें इतना हो अनुभव हो ही जाता है कि वे आवश्यक दवाइयां लिख सकते हैं। दवा लिखने का अधिकार मिलने से जिले के पीएचसी व सीएचसी में चिकित्सकों की कमी भी नहीं अखरेगी।